Himachal Cabinet Decision 2026: हिमाचल मंत्रिमंडल के बड़े फैसले: टोल और आबकारी नीति को मंजूरी, 1,617 करोड़ से स्वास्थ्य ढांचे का आधुनिकीकरण, 600 शिक्षकों सहित सैकड़ों पद सृजित

Himachal Cabinet Decision 2026: हिमाचल मंत्रिमंडल के बड़े फैसले: टोल और आबकारी नीति को मंजूरी, 1,617 करोड़ से स्वास्थ्य ढांचे का आधुनिकीकरण, 600 शिक्षकों सहित सैकड़ों पद सृजित
शिमला, 12 फरवरी 2026। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में आयोजित हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल की बैठक में प्रदेश के प्रशासनिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य, अवसंरचना और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। बैठक में टोल टैक्स बैरियर नीति 2026-27 और आबकारी नीति 2026-27 को स्वीकृति प्रदान की गई, जिनके माध्यम से राजस्व सुदृढ़ीकरण और व्यवस्थाओं में पारदर्शिता लाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही महिला होम गार्ड स्वयंसेवकों को 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश देने का ऐतिहासिक निर्णय लिया गया, जिससे महिला कर्मियों को सामाजिक सुरक्षा और सम्मानजनक कार्य वातावरण सुनिश्चित हो सकेगा।
मंत्रिमंडल ने आगामी बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण को भी मंजूरी दी। सामाजिक कल्याण की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए ‘इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना’ में संशोधन को स्वीकृति दी गई है। अब विधवाओं की बेटियों को राज्य के भीतर और बाहर स्थित सरकारी संस्थानों में व्यावसायिक पाठ्यक्रमों की पढ़ाई के लिए वित्तीय सहायता मिलेगी। यदि छात्रावास सुविधा उपलब्ध नहीं होगी, तो उन्हें 3,000 रुपये प्रतिमाह किराया सहायता भी प्रदान की जाएगी। यह निर्णय आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की बेटियों को उच्च शिक्षा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी क्रम में मंत्रिमंडल ने ‘इंदिरा गांधी मातृ शिशु संकल्प योजना’ लागू करने का निर्णय लिया है। इस योजना का उद्देश्य छह वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के पोषण स्तर में सुधार करना है। इसके तहत उन्नत पूरक पोषण उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार की उम्मीद है।
दिव्यांगजन कल्याण को प्राथमिकता देते हुए मंत्रिमंडल ने विवाह अनुदान में उल्लेखनीय वृद्धि की है। 70 प्रतिशत से अधिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए अनुदान राशि 50,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है, जबकि 40 से 70 प्रतिशत दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को 25,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। यह निर्णय दिव्यांगजनों को सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक सहयोग प्रदान करने की दिशा में अहम कदम है।
शिक्षा क्षेत्र में बड़ा फैसला लेते हुए प्रस्तावित सीबीएसई स्कूलों के लिए 600 पदों के सृजन को मंजूरी दी गई है। इनमें संस्कृत, शारीरिक शिक्षा, संगीत और ड्राइंग शिक्षकों के 150-150 पद शामिल हैं। इन पदों को राज्य चयन आयोग के माध्यम से भरा जाएगा। इसके अतिरिक्त राज्य भर में 31 बालक और बालिका विद्यालयों को सह-शिक्षा विद्यालयों में विलय करने का निर्णय लिया गया है, जिससे संसाधनों का बेहतर उपयोग और शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार संभव होगा। साथ ही 777 अतिरिक्त विद्यालयों में डिजिटल क्लासरूम परियोजना लागू करने की स्वीकृति दी गई है, जो डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में मंत्रिमंडल ने 1,617.40 करोड़ रुपये की व्यापक परियोजना को मंजूरी दी है, जिसके अंतर्गत चिकित्सा महाविद्यालयों, सुपर-स्पेशियलिटी अस्पतालों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों का आधुनिकीकरण किया जाएगा। इसका उद्देश्य राज्य में उन्नत और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है ताकि मरीजों को उपचार के लिए राज्य से बाहर न जाना पड़े। इसके अलावा कमला नेहरू अस्पताल शिमला के मातृ एवं शिशु अस्पताल, सुंदरनगर और नूरपुर के नागरिक अस्पतालों, क्षेत्रीय अस्पताल ऊना, भोरंज के 50 बिस्तर क्षमता वाले क्रिटिकल केयर ब्लॉक तथा बिलासपुर स्थित जिला एकीकृत जन स्वास्थ्य प्रयोगशाला के लिए आधुनिक उपकरणों की खरीद को मंजूरी दी गई है।
डॉ. वाई.एस. परमार राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय नाहन में इम्यूनोहेमेटोलॉजी एवं ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की स्थापना को स्वीकृति दी गई है। राज्य के सभी सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में बायोमेडिकल उपकरण प्रबंधन एवं अनुरक्षण कार्यक्रम लागू किया जाएगा, जिससे उपकरणों का नियमित रख-रखाव और रोगी सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
स्वास्थ्य एवं अन्य विभागों में बड़ी संख्या में पदों को भरने का निर्णय लिया गया है। भर्ती निदेशालय में कनिष्ठ अभियंता (सिविल) के 190 और कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) के 151 पद सृजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग में फार्मेसी अधिकारी के 40, सहायक स्टाफ नर्स के 150, रेडियोग्राफर के 30 पद भरे जाएंगे। नूरपुर, बद्दी और ऊना में औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं की स्थापना के साथ 36 पद सृजित किए जाएंगे। स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन विभाग में फूड सेफ्टी ऑफिसर के 10 पद भरे जाएंगे। इसके अतिरिक्त उच्च न्यायालय रजिस्ट्री में सफाई कर्मचारी के 8, सैनिक कल्याण विभाग में वेलफेयर ऑर्गेनाइजर के 5 और राजस्व विभाग में कनिष्ठ कार्यालय सहायक (आईटी) के 3 पद सृजित किए जाएंगे।
अवसंरचना के क्षेत्र में लोक निर्माण विभाग के लिए रोड ड्रेनेज नीति को मंजूरी दी गई है, जिससे सड़कों की मजबूती, रख-रखाव लागत में कमी और सुरक्षा मानकों में सुधार सुनिश्चित होगा। बिटुमिनस और फ्लेक्सिबल सड़कों पर गड्ढों की मरम्मत एवं पैच रिपेयर के लिए मानक संचालन प्रक्रिया को भी स्वीकृति दी गई है, जिससे राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य और पारदर्शिता सुनिश्चित होगी। सिरमौर जिले में लोक निर्माण विभाग मंडलों का पुनर्गठन विधानसभा क्षेत्रों के अनुरूप किया जाएगा।
खेल और युवा विकास को बढ़ावा देते हुए लुहणू खेल छात्रावास बिलासपुर की बिस्तर क्षमता 80 से बढ़ाकर 100 की गई है। चंबा जिले में डिस्टिल ग्लोबल स्किल्स एवं डिजिटल विश्वविद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। शिमला जिले के चौपाल में बालकों के लिए वॉलीबॉल छात्रावास, सिरमौर के शिलाई में बालिकाओं के लिए कबड्डी छात्रावास, जुब्बल में बालिकाओं के लिए बॉक्सिंग खेल तथा बिलासपुर के मोरसिंघी में हैंडबॉल खेल छात्रावास स्थापित किए जाएंगे।
इसके अतिरिक्त ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह की अध्यक्षता में एक मंत्रिमंडलीय उप-समिति गठित की गई है, जो हिमाचल प्रदेश राज्य लॉटरी (विनियमन) नियम, 2026 का प्रारूप तैयार करेगी।
इन व्यापक निर्णयों के साथ हिमाचल प्रदेश मंत्रिमंडल ने सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, खेल और अवसंरचना के क्षेत्रों में संतुलित और दूरगामी प्रभाव वाले कदम उठाए हैं, जिनसे राज्य के समग्र विकास को नई गति मिलने की उम्मीद है।





