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GB Pant Hospital: कोमोर्बिडिटी के साथ हृदय रोग से जूझ रहे बुजुर्गों को नया जीवन दे रहा जीबी पंत अस्पताल

GB Pant Hospital: कोमोर्बिडिटी के साथ हृदय रोग से जूझ रहे बुजुर्गों को नया जीवन दे रहा जीबी पंत अस्पताल

नई दिल्ली। मधुमेह, मोटापा, उच्च रक्तचाप और पुरानी फेफड़ों की बीमारी जैसी कोमोर्बिडिटी के साथ हृदय रोग से पीड़ित 70 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों के लिए जीबी पंत अस्पताल उम्मीद की नई किरण बनकर उभरा है। अस्पताल ने अत्याधुनिक चिकित्सा तकनीकों के माध्यम से ऐसे लगभग 100 बुजुर्गों का सफल इलाज कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, जिन्हें ओपन हार्ट सर्जरी के लिए अत्यधिक नाजुक माना जाता था।

जीबी पंत अस्पताल में ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वाल्व रिप्लेसमेंट यानी टीएवीआर प्रक्रिया और लीडलेस पेसमेकर इंप्लांट के जरिए इन बुजुर्ग मरीजों को नया जीवन दिया जा रहा है। यह दोनों ही प्रक्रियाएं बिना बड़ी सर्जरी के की जाती हैं, जिससे मरीजों को कम जोखिम, कम दर्द और जल्दी रिकवरी का लाभ मिलता है। दिल्ली सरकार की ओर से यह सुविधा विशेष रूप से 70 वर्ष से अधिक आयु के हृदय रोगियों को उपलब्ध कराई जा रही है।

पंत अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख और वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. युसूफ जमाल ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ दिल का कमजोर होना स्वाभाविक है, लेकिन सही समय पर सही इलाज और देखभाल से बुजुर्गों की जीवन गुणवत्ता को काफी हद तक बेहतर बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष की आयु के बाद धमनियां सख्त होने लगती हैं, रक्तचाप बढ़ता है और दिल को अधिक मेहनत करनी पड़ती है, जिससे हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर का खतरा बढ़ जाता है।

डॉ. जमाल के अनुसार, गंभीर एओर्टिक स्टेनोसिस यानी एओर्टिक वाल्व के सिकुड़ने की स्थिति में टीएवीआर प्रक्रिया अपनाई जाती है, जबकि हृदय की गति अत्यधिक धीमी होने, कंप्लीट हार्ट ब्लॉक या हाई ग्रेड एवी ब्लॉक की स्थिति में लीडलेस पेसमेकर लगाया जाता है। बीते दो वर्षों में जीबी पंत अस्पताल में 50 से अधिक लीडलेस पेसमेकर इंप्लांट और 50 से अधिक टीएवीआर प्रक्रियाएं सफलतापूर्वक की जा चुकी हैं, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

लीडलेस पेसमेकर एक अत्यंत छोटा कैप्सूलनुमा उपकरण होता है, जिसे सीधे हृदय के दाहिने वेंट्रिकल में प्रत्यारोपित किया जाता है। यह बिना किसी तार के सीधे विद्युत संकेत भेजकर हृदय की धड़कन को नियंत्रित रखता है। यह प्रक्रिया लोकल एनेस्थीसिया में कम समय में पूरी हो जाती है और बुजुर्ग मरीजों के लिए बेहद सुरक्षित मानी जाती है। वहीं टीएवीआर प्रक्रिया में छाती को खोले बिना कैथेटर के माध्यम से नया वाल्व लगाया जाता है, जिससे मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में भर्ती रहने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

डॉक्टरों का कहना है कि सही इलाज के साथ-साथ स्वस्थ जीवनशैली भी हृदय को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभाती है। संतुलित आहार, नियमित हल्का व्यायाम, तनाव से दूरी, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच बुजुर्गों के लिए बेहद जरूरी है। विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि सीने में दर्द, सांस फूलना, अचानक चक्कर आना या कमजोरी जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

जीबी पंत अस्पताल की यह पहल उन बुजुर्गों के लिए वरदान साबित हो रही है, जो उम्र और अन्य बीमारियों के कारण महंगी और जोखिम भरी ओपन हार्ट सर्जरी नहीं करा सकते थे। आधुनिक तकनीक और विशेषज्ञ डॉक्टरों की बदौलत अब ऐसे मरीज भी लंबा और बेहतर जीवन जीने की उम्मीद कर सकते हैं।

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