Gangster Act: 23 साल पुराने गैंगस्टर केस में साक्ष्यों के अभाव में तीन आरोपी बरी

Gangster Act: 23 साल पुराने गैंगस्टर केस में साक्ष्यों के अभाव में तीन आरोपी बरी

नोएडा की जिला अदालत ने करीब 23 वर्ष पुराने गैंगस्टर ऐक्ट के एक मामले में तीन आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट कहा कि केवल गैंग चार्ट तैयार कर देना या पुराने आपराधिक मामलों का उल्लेख कर देना किसी व्यक्ति को गैंगस्टर घोषित करने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा सकता। अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर ऐक्ट के तहत आवश्यक आरोपों को साबित करने में सफल नहीं हो सका।

यह मामला वर्ष 2003 में दर्ज किया गया था, जिसकी सुनवाई लंबे समय तक अदालत में चलती रही। सुनवाई के दौरान एक आरोपी खड़कू उर्फ सोमेंद्र की मृत्यु हो गई, जबकि एक अन्य आरोपी बाबूराम कबाड़ी उर्फ डॉक्टर बंगाली की पत्रावली अलग कर दी गई। इसके बाद मुकदमे की सुनवाई केवल शमशेर, इंतजार उर्फ गब्बू और राजपाल के खिलाफ जारी रही।

सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपियों को केवल गैंग चार्ट में नाम जोड़कर झूठा फंसाया गया है। उनका कहना था कि अभियोजन पक्ष यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी किसी संगठित गिरोह के सदस्य के रूप में अपराध कर आर्थिक लाभ अर्जित कर रहे थे या उन्होंने समाज में भय और आतंक का माहौल बनाया था।

विशेष अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद कहा कि गैंगस्टर ऐक्ट के तहत दोषसिद्धि के लिए केवल पुराने आपराधिक मुकदमों का रिकॉर्ड होना पर्याप्त आधार नहीं है। अभियोजन को यह भी साबित करना आवश्यक होता है कि आरोपी संगठित अपराध के जरिए आर्थिक लाभ प्राप्त कर रहे थे या गिरोह के रूप में आपराधिक गतिविधियों में शामिल थे।

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष ऐसे ठोस और पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका, जिनके आधार पर आरोपियों को दोषी ठहराया जा सके। इसी कारण शमशेर, इंतजार उर्फ गब्बू और राजपाल को संदेह का लाभ देते हुए गैंगस्टर ऐक्ट के इस मामले में बरी कर दिया गया।

 

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