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UN Fellowship SALW: लघु शस्त्र नियंत्रण पर संयुक्त राष्ट्र फेलोशिप का भारत में शुभारंभ

UN Fellowship SALW: लघु शस्त्र नियंत्रण पर संयुक्त राष्ट्र फेलोशिप का भारत में शुभारंभ

नई दिल्ली/जबलपुर, 16 फरवरी। भारत में लघु शस्त्र एवं हल्के हथियार नियंत्रण को लेकर एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय पहल की शुरुआत हुई है। Indian Army ने जबलपुर स्थित Military College of Materials Management में एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए लघु शस्त्र एवं हल्के हथियार (एसएएलडब्ल्यू) नियंत्रण पर पहली संयुक्त राष्ट्र फेलोशिप प्रशिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी शुरू की है। यह तीन सप्ताह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम 16 फरवरी से 6 मार्च 2026 तक आयोजित किया जाएगा।

यह फेलोशिप United Nations Office for Disarmament Affairs के एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय केंद्र द्वारा, Ministry of External Affairs और Ministry of Defence के तत्वावधान में आयोजित की जा रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य क्षेत्रीय स्तर पर अवैध हथियारों के प्रसार को रोकने और नियंत्रण तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए व्यावहारिक एवं तकनीकी प्रशिक्षण प्रदान करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन एशिया-प्रशांत क्षेत्र के निदेशक दीपयान बसु रे ने किया। इस अवसर पर एमसीएमएम के कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल संजय सेठी ने बहुपक्षीय सहयोग की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि अवैध हथियारों का प्रसार न केवल आंतरिक सुरक्षा बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता के लिए भी गंभीर चुनौती है। उन्होंने इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों को वैश्विक साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

फेलोशिप का मुख्य उद्देश्य संयुक्त राष्ट्र के ‘प्रोग्राम ऑफ एक्शन’ और ‘इंटरनेशनल ट्रेसिंग इंस्ट्रूमेंट’ के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए भाग लेने वाले अधिकारियों की तकनीकी और नीतिगत क्षमता को बढ़ाना है। प्रशिक्षण के दौरान हथियारों की पहचान, मार्किंग, रिकॉर्ड-कीपिंग, ट्रेसिंग मैकेनिज्म, सीमा प्रबंधन और अवैध तस्करी रोकने के उपायों पर विस्तृत सत्र आयोजित किए जाएंगे।

इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया, बांग्लादेश, भूटान सहित कुल 15 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं, जो एशिया-प्रशांत क्षेत्र में सहयोगात्मक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से क्षेत्रीय देशों के बीच बेहतर समन्वय, सूचना साझाकरण और संयुक्त रणनीति विकसित करने में मदद मिलेगी।

भारत द्वारा इस प्रकार के अंतरराष्ट्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की मेजबानी वैश्विक सुरक्षा शासन में उसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। साथ ही यह पहल इस बात का प्रमाण है कि भारत न केवल अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शांति, स्थिरता और निरस्त्रीकरण प्रयासों में भी सक्रिय योगदान दे रहा है।

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