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AIIMS Breakthrough Surgery: अत्याधुनिक तकनीक से कूबड़ का सफल इलाज, रीढ़ को सीधा कर रचा इतिहास

AIIMS Breakthrough Surgery: अत्याधुनिक तकनीक से कूबड़ का सफल इलाज, रीढ़ को सीधा कर रचा इतिहास

नई दिल्ली में AIIMS Delhi ने चिकित्सा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए रीढ़ की गंभीर विकृतियों के इलाज में नया इतिहास रच दिया है। पीवीसीआर तकनीक के जरिए अब कूबड़ जैसी जटिल समस्याओं का सुरक्षित और प्रभावी इलाज संभव हो गया है। इस तकनीक से संस्थान अब तक 100 से अधिक गंभीर मरीजों का सफलतापूर्वक ऑपरेशन कर चुका है, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

इस अत्याधुनिक सर्जरी को अस्थि रोग विभाग में स्पाइनल सर्जरी विशेषज्ञ Dr Bhavuk Garg के नेतृत्व में विकसित और सफलतापूर्वक लागू किया गया है। यह तकनीक पोस्टीरियर वर्टेब्रल कॉलम रिसेक्शन (पीवीसीआर) का संशोधित और अधिक सुरक्षित रूप है, जिसमें रीढ़ की विकृत संरचना को हटाकर उसे दोबारा संतुलित किया जाता है।

डॉक्टरों ने इस तकनीक में महत्वपूर्ण सुधार करते हुए सर्जरी के शुरुआती चरण में रीढ़ के कुछ हिस्सों को सुरक्षित रखने की नई रणनीति अपनाई है। इससे ऑपरेशन के दौरान शरीर की स्थिरता बनी रहती है और तंत्रिका तंत्र से जुड़ी जटिलताओं का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। यही वजह है कि अब उन मरीजों का भी सफल इलाज संभव हो पाया है, जिन्हें पहले हाई-रिस्क मानकर सर्जरी से दूर रखा जाता था।

इस तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रीढ़ की हड्डी के विकृत हिस्से को हटाकर उसे दोबारा जोड़ा जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, कई मामलों में रीढ़ को दो हिस्सों में काटकर फिर से जोड़ना पड़ा, जो पहले लगभग नामुमकिन माना जाता था। करीब सात वर्षों के क्लीनिकल अनुभव और रिसर्च के बाद यह तकनीक अब पूरी तरह से प्रभावी साबित हो रही है।

सर्जरी के बाद मरीजों में चौंकाने वाले सुधार देखे गए हैं। जो लोग पहले झुककर चलने को मजबूर थे, वे अब सीधे खड़े हो पा रहे हैं। कई मरीजों ने सामान्य जीवन में वापसी करते हुए पढ़ाई, नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों को फिर से संभालना शुरू कर दिया है।

इस स्वदेशी तकनीक की सफलता अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन चुकी है। अमेरिका और चीन सहित 26 से अधिक वैश्विक चिकित्सा संस्थान इस तकनीक को अपना रहे हैं, जिससे भारत की चिकित्सा विशेषज्ञता को वैश्विक पहचान मिल रही है।

कूबड़, जिसे मेडिकल भाषा में Kyphosis कहा जाता है, रीढ़ की हड्डी की एक ऐसी स्थिति है जिसमें पीठ का ऊपरी हिस्सा असामान्य रूप से झुक जाता है और उभार दिखाई देता है। इसके कारण मरीज को पीठ दर्द, जकड़न, जल्दी थकान और गंभीर मामलों में सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है।

इस समस्या के पीछे कई कारण हो सकते हैं, जिनमें रीढ़ की टीबी जैसे संक्रमण, जन्मजात विकृतियां, फ्रैक्चर, लंबे समय तक गलत पोस्चर, Osteoporosis और बढ़ती उम्र शामिल हैं। समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है।

एम्स की यह उपलब्धि न केवल चिकित्सा विज्ञान के क्षेत्र में एक नई दिशा दिखाती है, बल्कि उन हजारों मरीजों के लिए उम्मीद की किरण भी है, जो अब तक अपनी बीमारी को लाइलाज मान बैठे थे। यह तकनीक आने वाले समय में रीढ़ की जटिल बीमारियों के इलाज को पूरी तरह बदल सकती है।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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