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Noida: 49.50 लाख की साइबर व वित्तीय ठगी मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत नामंजूर

Noida: 49.50 लाख की साइबर व वित्तीय ठगी मामले में आरोपी की अग्रिम जमानत नामंजूर

नोएडा के सूरजपुर थाना क्षेत्र से जुड़े निवेश के नाम पर की गई बड़ी साइबर और वित्तीय धोखाधड़ी के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने 49 लाख 50 हजार रुपये की ठगी के आरोपी शुभम राज उर्फ पवन अग्रवाल की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि अपराध की प्रकृति और गंभीरता को देखते हुए आरोपी को राहत नहीं दी जा सकती।
मामले के अनुसार 21 जून 2025 को वादी जयप्रकाश की बातचीत फोन कॉल के जरिए दीपक कुमार सिंह, पवन अग्रवाल और धीरज मिश्रा से हुई थी। इन लोगों ने खुद को ग्रेटर नोएडा के सेक्टर जीटा-1 स्थित मिग्सन विलासा सोसाइटी का निवासी बताते हुए वादी को आकर्षक निवेश का झांसा दिया। आरोपियों ने बैंक ट्रांसफर के माध्यम से आधी कीमत पर प्रॉपर्टी दिलाने और कैश निवेश पर रकम दोगुनी करने का लालच दिया।
वादी की मुलाकात और बातचीत आरोपियों से उसके परिचित श्याम शर्मा के माध्यम से कराई गई। भरोसा दिलाने के लिए आरोपियों ने जयप्रकाश और उसके साथी को मिग्सन विलासा सोसाइटी के एक फ्लैट में बुलाया। वहीं पर उनसे कुल 49.50 लाख रुपये दो अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए गए।
राशि ट्रांसफर होने के अगले ही दिन जब वादी ने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की तो उनके मोबाइल फोन बंद मिले। इसके बाद जब वह बताए गए फ्लैट पर पहुंचा तो वह भी बंद मिला, जिससे ठगी का शक गहरा गया। 13 सितंबर को अखबार में प्रकाशित खबर के जरिए वादी को जानकारी मिली कि नोएडा एसटीएफ ने गाजियाबाद में इसी तरह की एक अन्य धोखाधड़ी के मामले में इन आरोपियों को गिरफ्तार किया है।
अग्रिम जमानत की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने दलील दी कि आरोपी के खाते में कोई रकम ट्रांसफर नहीं हुई है और न ही उसके पास से कोई बरामदगी हुई है। वहीं अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी के खिलाफ गाजियाबाद में एक अन्य आपराधिक मामला भी दर्ज है और वह विवेचना में सहयोग नहीं कर रहा है।
दोनों पक्षों की दलीलें और केस डायरी का अवलोकन करने के बाद अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया। अदालत का मानना था कि इस तरह के संगठित साइबर और वित्तीय अपराधों में आरोपी को राहत देना जांच को प्रभावित कर सकता है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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