Noida: दिल्ली की तर्ज पर नोएडा में भी नगर निगम की तैयारी, योगी सरकार कर रही बड़ा प्लान

Noida: दिल्ली की तर्ज पर नोएडा में भी नगर निगम की तैयारी, योगी सरकार कर रही बड़ा प्लान

नोएडा में जल्द ही प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। दिल्ली की तरह नोएडा में भी नगर निगम के गठन की दिशा में योगी सरकार ने कदम बढ़ा दिए हैं। उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण ने नोएडा में मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन यानी महानगर निगम बनाने को लेकर एक विस्तृत नोट तैयार किया है, जिसे अंतिम निर्णय के लिए राज्य कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। अगर इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो नोएडा की पहचान एक नए शहरी शासन मॉडल के रूप में उभर सकती है।

यह पहल 13 अगस्त 2025 को सुप्रीम कोर्ट के उस अहम निर्देश के बाद सामने आई है, जिसमें नोएडा अथॉरिटी को भंग कर उसकी जगह मेट्रोपॉलिटन कॉर्पोरेशन बनाने पर विचार करने को कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि इससे शहर के नागरिकों को बेहतर सुविधाएं और जवाबदेह प्रशासन मिल सकेगा। कोर्ट द्वारा गठित विशेष जांच टीम ने अपनी रिपोर्ट में नोएडा अथॉरिटी के कामकाज पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। रिपोर्ट में कहा गया था कि अथॉरिटी में फैसले कुछ गिने-चुने अधिकारियों तक सीमित हैं और जमीन आवंटन की नीतियां बिल्डरों के पक्ष में झुकी हुई हैं। पारदर्शिता और निष्पक्षता की भारी कमी को भी रिपोर्ट में उजागर किया गया था।

राज्य सरकार के इस कदम का नोएडावासियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों ने स्वागत किया है। दिल्ली-एनसीआर आरडब्ल्यूए की शीर्ष संस्था कॉनरवा के अध्यक्ष पी.एस. जैन ने कहा कि लंबे समय से यह मांग की जा रही थी कि नोएडा अथॉरिटी को नगर निकाय में बदला जाए, ताकि नागरिक सुविधाओं पर बेहतर ध्यान दिया जा सके। उन्होंने बताया कि इस संबंध में सरकार, नोएडा अथॉरिटी और स्थानीय विधायक को पत्र भी लिखे गए थे। उनका कहना है कि नोएडा अथॉरिटी का मुख्य काम जमीन अधिग्रहण करना, उसे विकसित करना और बेचना है, जबकि शहर की सफाई, सड़क, जलापूर्ति, सीवर, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं की देखरेख के लिए एक चुनी हुई स्थानीय सरकार ज्यादा उपयुक्त होती है।

वर्तमान में नोएडा देश का ऐसा बड़ा शहर है, जहां कोई चुनी हुई स्थानीय सरकार नहीं है। नगर निगम के गठन के बाद यहां पार्षदों और मेयर का चुनाव होगा, जिससे नागरिकों की भागीदारी सीधे प्रशासन में बढ़ेगी। स्थानीय मुद्दों पर फैसले लेने में पारदर्शिता आएगी और जनता के प्रति जवाबदेही भी तय होगी। माना जा रहा है कि इससे शहर की मूलभूत सुविधाओं, रखरखाव और विकास कार्यों में भी तेजी आएगी।

गौरतलब है कि नोएडा की स्थापना वर्ष 1976 में उत्तर प्रदेश इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट एक्ट के तहत हुई थी। तब से अब तक शहर का प्रशासन नोएडा अथॉरिटी के हाथों में रहा है। बदलते समय और बढ़ती आबादी के साथ अब एक चुनी हुई शहरी सरकार की जरूरत महसूस की जा रही है। अगर कैबिनेट से हरी झंडी मिलती है, तो नोएडा जल्द ही एक नए प्रशासनिक युग में प्रवेश करेगा, जो दिल्ली की तर्ज पर शहरी शासन का उदाहरण बन सकता है।

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