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YEIDA Plot Allotment: भूखंड आवंटन के बाद भी रजिस्ट्री को तरस रहे आवंटी, यीडा की प्रक्रिया पर सवाल

YEIDA Plot Allotment: भूखंड आवंटन के बाद भी रजिस्ट्री को तरस रहे आवंटी, यीडा की प्रक्रिया पर सवाल

नोएडा। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) द्वारा भूखंड आवंटन के बाद भी रजिस्ट्री और कब्जा न मिलने से बड़ी संख्या में आवंटी परेशान हैं। स्थिति यह है कि कई आवंटी पांच-पांच साल बाद भी प्राधिकरण के चक्कर काटने को मजबूर हैं। वहीं, यीडा ने रजिस्ट्री न कराने वाले 130 आवंटियों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है, लेकिन दूसरी ओर ऐसे कई मामले सामने आ रहे हैं, जहां आवंटी स्वयं रजिस्ट्री कराना चाहते हैं, मगर प्राधिकरण स्तर पर ही प्रक्रिया पूरी नहीं हो पा रही है।

ऐसा ही एक मामला मेटालिक इम्प्रेसंस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। कंपनी को जनवरी 2020 में यीडा के सेक्टर-33 में औद्योगिक प्लॉट संख्या 107 आवंटित किया गया था। कंपनी का आरोप है कि आवंटन के बावजूद अब तक न तो भूखंड की रजिस्ट्री हो पाई है और न ही उसे प्लॉट पर कब्जा दिया गया है। जबकि कंपनी ग्रेटर नोएडा में पहले से अपनी औद्योगिक इकाई संचालित कर रही है और नए प्रोजेक्ट को लेकर गंभीर थी।

कंपनी प्रबंधन का कहना है कि रजिस्ट्री और कब्जा न मिलने के कारण उसका प्रस्तावित नया प्रोजेक्ट काफी पीछे चला गया है। इससे न केवल निवेश की योजना प्रभावित हुई है, बल्कि आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है। कंपनी ने कई बार प्राधिकरण से संपर्क किया, पत्राचार किया और अधिकारियों से मुलाकात भी की, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो सका।

इस तरह के मामले सिर्फ एक-दो नहीं हैं। कई आवंटी ऐसे हैं, जो सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी रजिस्ट्री और कब्जे के इंतजार में हैं। आवंटियों का कहना है कि एक तरफ प्राधिकरण समय पर भुगतान न करने वालों पर सख्ती की बात करता है, तो दूसरी तरफ जिन लोगों ने नियमों का पालन किया है, उन्हें भी समय पर सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

यीडा के ओएसडी शैलेंद्र सिंह ने बताया कि यह मामला उनके संज्ञान में है और संबंधित फाइलों की समीक्षा की जा रही है। उन्होंने कहा कि एक सप्ताह के भीतर सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी कर रजिस्ट्री कराई जाएगी, जिसके बाद आवंटी को भूखंड पर कब्जा दे दिया जाएगा। प्राधिकरण का दावा है कि लंबित मामलों को प्राथमिकता पर निपटाने के निर्देश दिए गए हैं।

हालांकि, आवंटियों का कहना है कि जब तक जमीनी स्तर पर प्रक्रिया पूरी नहीं होती, तब तक आश्वासन से ज्यादा कुछ नहीं है। औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किए गए भूखंड आवंटन यदि समय पर रजिस्ट्री और कब्जे में ही उलझे रहेंगे, तो इससे निवेशकों का भरोसा कमजोर होना तय है। अब देखना यह होगा कि यीडा अपने दावों पर कितना अमल करता है और वर्षों से भटक रहे आवंटियों को कब राहत मिलती है।

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