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PM PRANAM Scheme: रासायनिक उर्वरकों की खपत घटाने पर राज्यों को मिलेगा वित्तीय प्रोत्साहन

PM PRANAM Scheme: रासायनिक उर्वरकों की खपत घटाने पर राज्यों को मिलेगा वित्तीय प्रोत्साहन

नई दिल्ली में केंद्र सरकार ने टिकाऊ और पर्यावरण अनुकूल कृषि को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। Jagat Prakash Nadda ने लोकसभा में जानकारी देते हुए बताया कि सरकार PM PRANAM Scheme के तहत रासायनिक उर्वरकों के उपयोग को कम करने वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को वित्तीय प्रोत्साहन देगी। इस योजना का उद्देश्य किसानों को जैविक और प्राकृतिक खेती की ओर प्रोत्साहित करना और मिट्टी की सेहत को बेहतर बनाना है।

मंत्री ने बताया कि यदि कोई राज्य या केंद्र शासित प्रदेश पिछले तीन वर्षों के औसत की तुलना में किसी वित्तीय वर्ष में यूरिया, डीएपी, एनपीके और एमओपी जैसे रासायनिक उर्वरकों की खपत कम करता है, तो बचाई गई उर्वरक सब्सिडी का 50 प्रतिशत हिस्सा उस राज्य को प्रोत्साहन राशि के रूप में दिया जाएगा।

सरकार के अनुसार इस प्रोत्साहन राशि का 95 प्रतिशत हिस्सा संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को दिया जाएगा, जबकि 5 प्रतिशत राशि निगरानी, जागरूकता अभियान, अनुसंधान और क्षमता निर्माण जैसे कार्यों पर खर्च की जाएगी। हालांकि मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक इस योजना के तहत किसी भी राज्य या केंद्र शासित प्रदेश को प्रोत्साहन राशि जारी नहीं की गई है।

केंद्र सरकार का कहना है कि देश में टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने के लिए जैविक, बायो और नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके साथ ही प्राकृतिक खेती, माइक्रो-इरिगेशन और आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक Paramparagat Krishi Vikas Yojana के तहत अब तक देश में लगभग 18.84 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया जा चुका है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों के लिए चलाई जा रही Mission Organic Value Chain Development for North Eastern Region योजना के अंतर्गत 2.36 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में जैविक खेती को बढ़ावा दिया गया है।

इसके अलावा National Mission on Natural Farming के तहत देश में करीब 8.57 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को कवर किया गया है और लगभग 17.45 लाख किसानों को इस पहल से जोड़ा गया है। सरकार का मानना है कि इन योजनाओं के माध्यम से खेती में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण के साथ-साथ किसानों की आय में भी सुधार होगा।

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संवाददाता

Tirthankar Sarkar

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