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Delhi Pollution Crisis: दम घोंटती दिल्ली में जश्न किसका, प्रदूषण संकट के बीच 31 दिसंबर के कॉन्सर्ट पर सियासी घमासान

Delhi Pollution Crisis: दम घोंटती दिल्ली में जश्न किसका, प्रदूषण संकट के बीच 31 दिसंबर के कॉन्सर्ट पर सियासी घमासान

रिपोर्ट: रवि डालमिया

जब पूरी दिल्ली जहरीली हवा में सांस लेने को मजबूर है और वायु गुणवत्ता लगातार गंभीर से अत्यंत गंभीर श्रेणी में बनी हुई है, ऐसे समय में 31 दिसंबर की रात द्वारका में प्रस्तावित एक बड़े व्यावसायिक मनोरंजन कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। इस आयोजन को लेकर स्थानीय नागरिकों खासकर महिलाओं के विरोध के बाद यह सवाल सीधे सरकार और प्रशासन की संवेदनशीलता पर जा टिका है कि क्या राजधानी में नागरिकों का स्वास्थ्य प्राथमिकता है या फिर कॉरपोरेट मनोरंजन और मुनाफा।

शुक्रवार को गोयला डेरी, द्वारका की दर्जनों महिलाओं ने एकजुट होकर द्वारका जिले के पुलिस उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा और कार्यक्रम की अनुमति तत्काल रद्द करने की मांग की। ज्ञापन में महिलाओं ने कहा कि दिल्ली पहले ही प्रदूषण के गंभीर संकट से जूझ रही है और ऐसे हालात में तेज ध्वनि, हाई पावर लाइटिंग, डीजल जनरेटर और हजारों लोगों की भीड़ वाले कार्यक्रम की इजाजत देना सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है। महिलाओं का कहना है कि प्रशासन की चुप्पी इस आयोजन को मौन स्वीकृति देने जैसी है।

इस कार्यक्रम में लोकप्रिय कलाकार बाबू मान, प्रांजल दहिया और डीजे रविश की प्रस्तुति की जानकारी सोशल मीडिया और ऑनलाइन टिकट प्लेटफॉर्म पर खुले तौर पर प्रचारित की जा रही है। BookMyShow और Premier Tickets जैसे प्लेटफॉर्म पर टिकटों की बिक्री जारी है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटने की पूरी संभावना है। विरोध कर रही महिलाओं और स्थानीय निवासियों का आरोप है कि यह आयोजन जनहित से अधिक व्यावसायिक लाभ को ध्यान में रखकर कराया जा रहा है, जिसमें नागरिकों के स्वास्थ्य को नजरअंदाज किया जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने सुप्रीम कोर्ट, नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति के दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि खराब वायु गुणवत्ता की स्थिति में इस तरह के बड़े सार्वजनिक और मनोरंजन आयोजनों पर रोक लगाने के स्पष्ट निर्देश हैं। इसके बावजूद यदि कार्यक्रम को अनुमति दी जाती है या अनुमति की प्रक्रिया जारी रखी जाती है, तो यह इन संवैधानिक और पर्यावरणीय संस्थाओं के आदेशों की सीधी अवहेलना मानी जाएगी।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार एक तरफ प्रदूषण को लेकर आपात बैठकें करती है, ग्रैप लागू करने की बातें करती है और आम नागरिकों पर प्रतिबंध लगाती है, वहीं दूसरी ओर बड़े आयोजकों और कॉरपोरेट कार्यक्रमों के लिए नियमों में ढील दे दी जाती है। इससे प्रशासन का दोहरा मापदंड उजागर होता है, जहां आम जनता पर सख्ती और बड़े आयोजनों को छूट मिलती नजर आती है।

महिलाओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि 31 दिसंबर का यह कार्यक्रम रद्द नहीं किया गया तो इसे नागरिक स्वास्थ्य के खिलाफ एक प्रशासनिक अपराध माना जाएगा और विरोध को और व्यापक स्तर पर तेज किया जाएगा। उनका कहना है कि यह मामला अब केवल एक कॉन्सर्ट का नहीं रहा, बल्कि यह दिल्ली में शासन, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक अधिकारों के बीच टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है।

फिलहाल इस पूरे विवाद पर प्रशासन की ओर से कोई स्पष्ट और आधिकारिक सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे लोगों की चिंताएं और बढ़ गई हैं। राजधानी में दम घोंटती हवा के बीच यह सवाल लगातार गूंज रहा है कि आखिर इस जश्न का फायदा किसे और कीमत कौन चुका रहा है।

 

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