
Holi Dry Day Delhi: दिल्ली में ‘गुलाल’ के साथ छलका ‘जाम’, होली पर नहीं रहा ड्राई डे
रिपोर्ट: रवि डालमिया
देश की राजधानी Delhi में इस बार होली का रंग परंपरा से अलग अंदाज में देखने को मिला। जहां पिछले कई दशकों से होली के दिन ‘ड्राई डे’ घोषित किया जाता रहा है, वहीं इस वर्ष सरकार ने बड़ा बदलाव करते हुए मुख्य पर्व के दिन शराब की दुकानों को खुला रखने का फैसला लिया। इस निर्णय के बाद होली के जश्न में ‘गुलाल’ के साथ ‘जाम’ भी खुलकर छलकता नजर आया।
दिल्ली सरकार के आबकारी विभाग द्वारा लिए गए इस फैसले के तहत 4 मार्च (बुधवार) को होली के दिन शहर में शराब की दुकानें सामान्य दिनों की तरह संचालित होती रहीं। आमतौर पर राष्ट्रीय पर्व, धार्मिक त्योहारों और विशेष अवसरों पर राजधानी में ड्राई डे लागू रहता है, लेकिन इस बार इस परंपरा को तोड़ दिया गया। सरकार के इस कदम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
शराब प्रेमियों के लिए यह फैसला किसी तोहफे से कम नहीं रहा। कई लोगों ने इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता और व्यवसायिक गतिविधियों के लिहाज से सही कदम बताया। उनका कहना है कि त्योहार के दिन जब लोग घरों और दोस्तों के साथ जश्न मनाते हैं, तब ऐसे प्रतिबंधों की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए। बाजारों में भी होली के दिन ग्राहकों की आवाजाही देखी गई और कई दुकानों पर सुबह से ही रौनक बनी रही।
वहीं दूसरी ओर, कुछ लोगों और दुकानदारों ने सरकार के इस फैसले पर सवाल भी उठाए। एक दुकानदार मोहन ने कहा कि सरकार का यह निर्णय त्योहार की भावना के अनुरूप नहीं है। उनका कहना है कि होली जैसे बड़े त्योहार पर स्टाफ को भी परिवार के साथ समय बिताने और रंग खेलने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि दुकानें खोलनी ही थीं तो कम से कम दोपहर 2 बजे के बाद खोलने का आदेश दिया जाता, ताकि कर्मचारी सुबह का समय अपने परिवार और दोस्तों के साथ बिता पाते।
समाज के कुछ वर्गों ने इस फैसले को कानून-व्यवस्था से भी जोड़कर देखा। उनका मानना है कि त्योहारों के दौरान शराब की उपलब्धता से सार्वजनिक स्थानों पर अव्यवस्था की आशंका बढ़ सकती है। हालांकि प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाने की बात कही गई है, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना से बचा जा सके।
राजधानी में होली का उत्सव पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। रंग, गुलाल और पानी की बौछारों के बीच इस बार ‘ड्राई डे’ न होने का मुद्दा भी चर्चा का केंद्र बना रहा। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या दिल्ली सरकार भविष्य में भी इसी नीति को जारी रखती है या फिर परंपरागत व्यवस्था को बहाल किया जाएगा।





