Defence Health Security: स्वास्थ्य सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है, बोले राजनाथ सिंह

Defence Health Security: स्वास्थ्य सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा है, बोले राजनाथ सिंह
नई दिल्ली में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि आज के समय में स्वास्थ्य सुरक्षा ही वास्तविक राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने यह बात दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (आरएंडआर) में सैन्य चिकित्सा ढांचे के विस्तार और आधुनिकीकरण से जुड़े बड़े कार्यक्रम के दौरान कही। इस अवसर पर सैन्य स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं की आधारशिला रखी गई।
रक्षा मंत्री ने आर्मी हॉस्पिटल (आरएंडआर) में नेत्र, कैंसर और जॉइंट रिप्लेसमेंट के लिए अत्याधुनिक सुपर-स्पेशियलिटी केंद्रों की नींव रखी। इसके साथ ही दिल्ली कैंट स्थित बेस हॉस्पिटल में 998 बेड और 100 इमरजेंसी बेड वाले नए इंफ्रास्ट्रक्चर का भी शुभारंभ किया गया। इन सुविधाओं से सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधा उपलब्ध होगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवाएं (AFMS) देश की सुरक्षा व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नवाचार, तकनीक और क्षमता निर्माण के बिना सैन्य चिकित्सा प्रणाली भविष्य की चुनौतियों का सामना नहीं कर सकती। उन्होंने AFMS द्वारा नेपाल सहित अन्य देशों में चलाए जा रहे मेडिकल कैंप और आई केयर सेवाओं को भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का उदाहरण बताया।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत को केवल जेनेरिक दवाओं तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि नई दवाओं के अनुसंधान, क्लीनिकल ट्रायल में सुधार और फार्मा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। इसके साथ ही एक राष्ट्रीय डेटा पूल और मजबूत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया गया।
रक्षा मंत्री ने कहा कि मजबूत स्वास्थ्य ढांचा सैनिकों को बिना किसी चिंता के अपने मिशन पूरे करने का भरोसा देता है, इसलिए बेहतर मेडिकल सिस्टम सीधे तौर पर राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करता है।
इस कार्यक्रम में एएफएमएस के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल का पुरस्कार पुणे के कमांड हॉस्पिटल (सदर्न कमांड) को मिला, जबकि दूसरा स्थान मुंबई के आईएनएचएस अश्विनी को दिया गया। इस अवसर पर चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ अनिल चौहान, नौसेना प्रमुख दिनेश त्रिपाठी और थल सेनाध्यक्ष उपेंद्र द्विवेदी सहित शीर्ष सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।





