Cyber Fraud News: कम ब्याज पर लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार

Cyber Fraud News: कम ब्याज पर लोन दिलाने के नाम पर ठगी करने वाले फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़, 5 आरोपी गिरफ्तार
नोएडा। नोएडा पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान “ऑपरेशन साइबर वज्र” के तहत बड़ी सफलता हासिल करते हुए कम ब्याज पर लोन दिलाने का झांसा देकर लोगों से ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो प्रोसेसिंग फीस, वेरिफिकेशन चार्ज और अन्य शुल्क के नाम पर लोगों से पैसे वसूलकर उन्हें ठगी का शिकार बना रहे थे। आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन, लैपटॉप, बैंक दस्तावेज, कॉलिंग डेटा, स्क्रिप्ट बुक और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं।
एडीसीपी मनीषा सिंह ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर लगातार ऑनलाइन ठगी की शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। शिकायतों के आधार पर थाना स्तर पर 159 संदिग्ध बैंक खातों को चिन्हित किया गया। जांच के दौरान इनमें से 19 खाते रेड जोन में पाए गए। इसके बाद पुलिस ने इन खातों से जुड़े लगभग 2500 मोबाइल नंबरों का इलेक्ट्रॉनिक विश्लेषण किया। कॉल डिटेल रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रेल और स्थानीय खुफिया जानकारी की मदद से पुलिस सेक्टर-2 स्थित डी-80 बिल्डिंग की पहली मंजिल पर संचालित फर्जी कॉल सेंटर तक पहुंच गई।
जांच में सामने आया कि गिरोह के सदस्य इंटरनेट और अन्य माध्यमों से ऐसे लोगों का डेटा जुटाते थे, जो लोन लेने के इच्छुक होते थे। इसके बाद उन्हें फोन कर बाजार से कम ब्याज दर पर तत्काल लोन उपलब्ध कराने का दावा किया जाता था। ग्राहकों का विश्वास जीतने के लिए आरोपी खुद को बैंक या प्रतिष्ठित फाइनेंस कंपनियों का प्रतिनिधि बताकर पेश करते थे और पूरी बातचीत पेशेवर अंदाज में करते थे।
जब कोई व्यक्ति उनकी बातों में आ जाता था, तो उससे आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक खाते की जानकारी और ओटीपी जैसी संवेदनशील जानकारियां मांगी जाती थीं। इसके बाद प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज, इंश्योरेंस या वेरिफिकेशन फीस के नाम पर बैंक खाते में रकम जमा कराई जाती थी। जैसे ही पैसे मिल जाते, आरोपी लोन की प्रक्रिया रोक देते और पीड़ित के फोन उठाना बंद कर देते। इस तरह लोगों को न तो लोन मिलता था और न ही जमा की गई राशि वापस की जाती थी।
पुलिस के अनुसार इस गिरोह के खिलाफ एनसीआरपी पोर्टल पर देश के विभिन्न राज्यों से 10 से अधिक शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि आरोपियों ने इसी तरीके से कई लोगों से करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की है। पुलिस अब बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन, मोबाइल डेटा और कॉल रिकॉर्ड के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है, ताकि गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान की जा सके।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पवन कुमार (33), मोहित (24), हर्ष शर्मा (23), स्वाती (27) और प्रीती (35) के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार पवन कुमार इस पूरे गिरोह का मुख्य संचालक है, जबकि अन्य आरोपी कॉलिंग, दस्तावेज एकत्र करने और प्रोसेसिंग फीस वसूलने का काम करते थे। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस नेटवर्क का संचालन कितने समय से किया जा रहा था और इसमें अन्य राज्यों के लोग भी शामिल हैं या नहीं।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने पांच मोबाइल फोन, तीन लैपटॉप, छह चेकबुक, एक पासबुक, 160 कॉलिंग डेटा शीट, 11 स्क्रिप्ट बुक, एक बिलिंग बुक और इंटरनेट राउटर बरामद किया है। इन डिजिटल और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस पूरे साइबर ठगी नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने और पीड़ितों की संख्या का पता लगाने में जुटी हुई है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि कम ब्याज पर तुरंत लोन दिलाने का दावा करने वाले अनजान कॉल या संदेशों से सावधान रहें और किसी भी स्थिति में प्रोसेसिंग फीस या ओटीपी साझा न करें।
