Child Safety Tips: एम्स में 14 माह की बच्ची की जिंदगी बचाई, इसोफेगस से स्प्रिंग सुरक्षित निकाला गया

Child Safety Tips: एम्स में 14 माह की बच्ची की जिंदगी बचाई, इसोफेगस से स्प्रिंग सुरक्षित निकाला गया
नई दिल्ली, 5 फरवरी: छोटे बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देना कितना जरूरी है, इसका उदाहरण हाल ही में एम्स दिल्ली में देखने को मिला। यमुनानगर क्षेत्र की 14 माह की एक मासूम बच्ची को करीब एक हफ्ते से लगातार उल्टी होने और दो दिनों से खाना न खाने की समस्या के बाद एम्स अस्पताल लाया गया। जांच में पता चला कि बच्ची की खाने की नली (इसोफेगस) में एक बड़ा धातु का स्प्रिंग फंसा हुआ था, जो उसके जीवन के लिए खतरा बन गया था।
एम्स बाल शल्य चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर विशेष जैन ने बताया कि बच्ची पहले एक निजी अस्पताल में एंडोस्कोपी के माध्यम से स्प्रिंग निकालने की कोशिश की गई थी, लेकिन वहां खाने की नली में सूजन और घाव होने के कारण यह प्रक्रिया बेहद जोखिमभरी मानी गई। इसके बाद बच्ची को तुरंत एम्स दिल्ली रेफर किया गया।
एम्स में प्रोफेसर विशेष जैन की टीम ने अत्याधुनिक एंडोस्कोपिक तकनीक का उपयोग करते हुए स्प्रिंग को सावधानीपूर्वक घुमाकर इसोफेगस से बाहर निकाला। इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की परफोरेशन (खाने की नली में छेद या फटना) से भी बचाव किया गया। सर्जरी के अगले दिन ही बच्ची को ओरल फीड देना शुरू कर दिया गया और अब उसकी हालत में लगातार सुधार देखा जा रहा है।
प्रोफेसर विशेष जैन ने माता-पिता और परिवारों को चेताया कि बच्चों को खेलने और कूदने के दौरान अकेला न छोड़ें। साथ ही छोटे-छोटे सामान जैसे कि सिक्के, माला के मोती, अंगूठियां, ब्लेड और कीटनाशक जैसी वस्तुओं को बच्चों की पहुंच से दूर रखें। उनका कहना है कि लापरवाही सिर्फ छोटी परेशानी नहीं, बल्कि बच्चों के लिए गंभीर और जानलेवा समस्या बन सकती है।
इस घटना ने यह साबित कर दिया कि समय पर उचित चिकित्सा और विशेषज्ञ टीम की सतर्कता से बच्चों की जिंदगी बचाई जा सकती है। एम्स की यह सफलता न केवल चिकित्सा कौशल बल्कि बच्चों की सुरक्षा और जागरूकता के महत्व को भी दर्शाती है।




