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CBSE: सीबीएसई के तीन भाषा फॉर्मूले के खिलाफ शिक्षक और अभिभावक पहुंचे मुख्यालय, नियमों में बदलाव की उठी मांग

CBSE: सीबीएसई के तीन भाषा फॉर्मूले के खिलाफ शिक्षक और अभिभावक पहुंचे मुख्यालय, नियमों में बदलाव की उठी मांग

राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) द्वारा लागू किए गए तीन भाषाई फॉर्मूले को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी मुद्दे पर सोमवार को नोएडा सहित कई स्थानों से शिक्षक और अभिभावक दिल्ली के द्वारका स्थित सीबीएसई मुख्यालय पहुंचे और नई व्यवस्था के खिलाफ अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

नई शिक्षा नीति के तहत लागू किए गए नियमों के अनुसार, नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को अब तीन भाषाएं पढ़नी अनिवार्य होंगी, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होना जरूरी है। इस बदलाव के बाद कई स्कूलों में पहले से पढ़ाई जा रही विदेशी भाषाओं को हटाकर उनकी जगह संस्कृत या अन्य भारतीय भाषाओं को शामिल किया जा रहा है, जिससे छात्रों और अभिभावकों में असंतोष देखा जा रहा है।

शिक्षकों और अभिभावकों का कहना है कि यह निर्णय विद्यार्थियों के शैक्षणिक विकल्पों और उनके भविष्य की संभावनाओं को प्रभावित कर सकता है। उनका मानना है कि छात्रों को उनकी रुचि और करियर की आवश्यकताओं के अनुसार भाषा चुनने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

सोमवार को पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने सीबीएसई अधिकारियों को इस संबंध में ज्ञापन सौंपा और नियमों में संशोधन की मांग की। नोएडा से पहुंचे शिक्षकों ने बताया कि इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अभिभावक भी शामिल हुए, जिन्होंने एकजुट होकर अपनी चिंताओं को साझा किया।

प्रतिभागियों ने यह भी कहा कि विदेशी भाषाओं की पढ़ाई बंद या सीमित करने से वैश्विक स्तर पर छात्रों के अवसर प्रभावित हो सकते हैं। वहीं स्कूलों में इस नई व्यवस्था के चलते शिक्षकों के समायोजन की स्थिति भी उत्पन्न हो रही है, जिससे शैक्षणिक ढांचे पर असर पड़ रहा है।

फिलहाल यह मामला शिक्षा जगत में चर्चा का विषय बना हुआ है और सभी की निगाहें सीबीएसई के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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