Chemotherapy: कीमोथेरेपी का डर होगा कम! जीनोमिक टेस्ट बताएगा किसे है वास्तव में जरूरत, ब्रेस्ट कैंसर उपचार में बड़ा बदलाव

Chemotherapy: कीमोथेरेपी का डर होगा कम! जीनोमिक टेस्ट बताएगा किसे है वास्तव में जरूरत, ब्रेस्ट कैंसर उपचार में बड़ा बदलाव

नई दिल्ली/लंदन, 2 जून। ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में जल्द ही एक क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल सकता है। वैज्ञानिकों ने एक ऐसे जीनोमिक टेस्ट की प्रभावशीलता साबित की है जो यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि किसी मरीज को वास्तव में कीमोथेरेपी की आवश्यकता है या नहीं। यदि टेस्ट में कैंसर के दोबारा लौटने का जोखिम कम पाया जाता है, तो मरीज का सफल उपचार केवल हार्मोन थेरेपी के जरिए भी किया जा सकता है। इससे लाखों महिलाओं को कीमोथेरेपी से जुड़े गंभीर दुष्प्रभावों से बचाया जा सकेगा।

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (यूसीएल) के नेतृत्व में किए गए अंतरराष्ट्रीय क्लीनिकल ट्रायल ‘ऑप्टिमा’ के परिणामों ने व्यक्तिगत यानी पर्सनलाइज्ड कैंसर उपचार की दिशा में नई उम्मीद जगाई है। इस अध्ययन के निष्कर्ष अमेरिका के शिकागो शहर में आयोजित होने वाली अमेरिकन सोसाइटी ऑफ क्लीनिकल ऑन्कोलॉजी (एएससीओ) की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किए जाएंगे।

अध्ययन में ब्रिटेन, नॉर्वे, स्वीडन, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और थाईलैंड सहित कई देशों के 40 वर्ष या उससे अधिक आयु के 4,429 ब्रेस्ट कैंसर मरीजों को शामिल किया गया। शोधकर्ताओं ने मरीजों के ट्यूमर ऊतकों पर ‘प्रोजिग्ना’ नामक उन्नत जीनोमिक टेस्ट किया। यह परीक्षण 50 महत्वपूर्ण जीनों की सक्रियता का विश्लेषण कर कैंसर की प्रकृति और उसके भविष्य में दोबारा लौटने की संभावना का आकलन करता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह टेस्ट अगले 10 वर्षों में कैंसर के दोबारा होने के जोखिम का अनुमान लगाने में सक्षम है। यदि मरीज का जोखिम स्तर कम पाया जाता है, तो डॉक्टर कीमोथेरेपी के बजाय केवल हार्मोन थेरेपी के जरिए उपचार करने का निर्णय ले सकते हैं। इससे मरीजों को बाल झड़ना, अत्यधिक थकान, मतली, बांझपन और मानसिक तनाव जैसे दुष्प्रभावों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

अध्ययन के दौरान कम जोखिम वाले मरीजों को केवल हार्मोन थेरेपी दी गई, जबकि दूसरे समूह को कीमोथेरेपी के साथ हार्मोन थेरेपी भी दी गई। पांच वर्षों तक मरीजों की निगरानी के बाद सामने आया कि कीमोथेरेपी और हार्मोन थेरेपी दोनों लेने वाले 95 प्रतिशत मरीज जीवित और कैंसर-मुक्त रहे। वहीं केवल हार्मोन थेरेपी लेने वाले 94 प्रतिशत मरीज भी स्वस्थ पाए गए। विशेषज्ञों का कहना है कि दोनों समूहों के परिणामों में बहुत मामूली अंतर था, जिससे यह स्पष्ट होता है कि कई मरीजों के लिए कीमोथेरेपी को सुरक्षित रूप से टाला जा सकता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह अध्ययन कैंसर उपचार के पारंपरिक तरीकों में बड़ा बदलाव ला सकता है। अब केवल ट्यूमर के आकार या अन्य सामान्य मानकों के आधार पर इलाज तय करने के बजाय उसकी जैविक विशेषताओं और जीन गतिविधियों को ध्यान में रखकर उपचार निर्धारित किया जा सकेगा। इससे प्रत्येक मरीज को उसकी जरूरत के अनुसार सटीक और प्रभावी इलाज मिल सकेगा।

यूसीएल के मुख्य अन्वेषक प्रोफेसर रॉब स्टीन ने कहा कि यह ट्रायल कैंसर उपचार में व्यक्तिगत चिकित्सा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उनके अनुसार ट्यूमर की बायोलॉजी के आधार पर इलाज तय करने से मरीजों को अनावश्यक टॉक्सिसिटी और कीमोथेरेपी के दुष्प्रभावों से बचाया जा सकेगा, जिससे उनकी जीवन गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तकनीक व्यापक स्तर पर अपनाई जाती है, तो भविष्य में ब्रेस्ट कैंसर के लाखों मरीजों के उपचार का तरीका बदल सकता है और उन्हें अधिक सुरक्षित, सटीक तथा व्यक्तिगत चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

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