Himachal CM Sukhu: शिमला रिज पर मुख्यमंत्री का धरना, मनरेगा खत्म करने के फैसले को बताया जनविरोधी, हिमाचल को होगा भारी नुकसान

Himachal CM Sukhu: शिमला रिज पर मुख्यमंत्री का धरना, मनरेगा खत्म करने के फैसले को बताया जनविरोधी, हिमाचल को होगा भारी नुकसान
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को शिमला के ऐतिहासिक रिज मैदान में महात्मा गांधी की प्रतिमा के समीप केन्द्र सरकार के मनरेगा को समाप्त करने के फैसले के विरोध में अपने मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ धरना दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने केन्द्र सरकार पर ग्रामीण गरीबों के साथ अन्याय करने का आरोप लगाते हुए कहा कि मनरेगा को समाप्त करने का निर्णय पूरी तरह जनविरोधी है और इससे हिमाचल प्रदेश को विशेष रूप से गंभीर नुकसान उठाना पड़ेगा।
धरने को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि मनरेगा योजना की शुरुआत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और गरीबी कम करने के उद्देश्य से कांग्रेस सरकार ने की थी। यह योजना पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की दूरदर्शी सोच का परिणाम थी। उन्होंने कहा कि पहले ग्राम पंचायतों और ग्राम सभाओं की मांग के आधार पर विकास कार्य तय किए जाते थे और स्थानीय जरूरतों के अनुसार योजनाएं बनाई और लागू की जाती थीं, लेकिन अब केन्द्र सरकार के नए प्रावधानों से पंचायतों की भूमिका लगभग समाप्त कर दी गई है।
मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि अब मनरेगा के तहत योजनाओं का निर्धारण केन्द्र सरकार करेगी और वही तय करेगी कि किस क्षेत्र में कौन सा विकास कार्य होगा। इससे न केवल स्थानीय स्वायत्तता कमजोर होगी, बल्कि ग्रामीण जरूरतों की अनदेखी भी होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी इस फैसले के खिलाफ जिला और ब्लॉक स्तर तक आंदोलन करेगी, ताकि आम जनता को केन्द्र सरकार के इस निर्णय के दुष्परिणामों से अवगत कराया जा सके।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लिए यह फैसला और भी चिंताजनक है, क्योंकि पहले मनरेगा के तहत मजदूरों की 100 प्रतिशत दिहाड़ी केन्द्र सरकार द्वारा दी जाती थी और प्रदेश सरकार अपनी ओर से अतिरिक्त 80 रुपये मजदूरी में जोड़ती थी। अब नए प्रावधानों के अनुसार केवल 90 प्रतिशत राशि केन्द्र सरकार देगी, जबकि 10 प्रतिशत बोझ प्रदेश सरकार पर डाला गया है, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा। मुख्यमंत्री ने मांग की कि मनरेगा को पंचायतों की मांग और क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों के आधार पर ही लागू किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने यह भी कहा कि नई व्यवस्था में जिला परिषदों में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों को मिलने वाली राशि भी समाप्त कर दी गई है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली प्रभावित होगी। एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा सेब पर आयात शुल्क घटाने के फैसले का भी विरोध किया और कहा कि इससे हिमाचल के बागवानों को भारी नुकसान होगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस मुद्दे को केन्द्र सरकार के समक्ष मजबूती से उठाया जाएगा, ताकि प्रदेश के बागवानों के हितों की रक्षा की जा सके।
धरने में उप-मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री, हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष विनय कुमार, उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान, राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी, पंचायती राज मंत्री अनिरूद्ध सिंह, तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी, आयुष मंत्री यादवेन्द्र गोमा, कांग्रेस के सह-प्रभारी चेतन चौहान, विधायक चन्द्रशेखर और अनुराधा राणा सहित कई वरिष्ठ नेता, निगम-बोर्ड के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष, शिमला नगर निगम के महापौर, उप-महापौर और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।





