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AIIMS Delhi: देश में युवाओं की अचानक मौतों का कारण कोविड नहीं, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, एम्स दिल्ली की स्टडी में बड़ा खुलासा

AIIMS Delhi: देश में युवाओं की अचानक मौतों का कारण कोविड नहीं, कोरोनरी आर्टरी डिजीज, एम्स दिल्ली की स्टडी में बड़ा खुलासा

नई दिल्ली। देश में युवाओं की अचानक हो रही मौतों को लेकर उठ रहे सवालों पर एम्स दिल्ली ने वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर स्थिति स्पष्ट कर दी है। एम्स के न्याय चिकित्सा विभाग द्वारा किए गए एक साल लंबे गहन अध्ययन में यह निष्कर्ष सामने आया है कि युवाओं की अचानक मौतों और कोविड-19 वैक्सीनेशन के बीच कोई भी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष वैज्ञानिक संबंध नहीं पाया गया है। रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि इन मौतों के पीछे प्रमुख वजह हृदय संबंधी बीमारियां हैं, खासतौर पर कोरोनरी आर्टरी डिजीज यानी सीएडी।

यह अध्ययन एम्स दिल्ली के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग ने फोरेंसिक मुर्दाघर से प्राप्त कुल 2,214 ऑटोप्सी मामलों में से किया, जिनमें 18 से 45 वर्ष आयु वर्ग के 180 ऐसे मामलों को चुना गया जो अचानक मृत्यु के मानकों पर खरे उतरते थे। यह संख्या कुल ऑटोप्सी मामलों का लगभग 8.1 प्रतिशत थी। विश्लेषण में सामने आया कि करीब दो-तिहाई मामलों में मौत का कारण कार्डियक यानी हृदय संबंधी था और इनमें सीएडी सबसे आम अंतर्निहित बीमारी के रूप में पाई गई। वहीं लगभग एक-तिहाई मामलों में मौत गैर-कार्डियक मेडिकल कारणों से हुई।

मुख्य शोधकर्ता डॉ. सुधीर गुप्ता के अनुसार, ऑटोप्सी डेटा पर आधारित यह शोध लोगों को अचानक होने वाली युवा मौतों को समझने में मदद करेगा और इससे फैल रही भ्रांतियों को भी दूर किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि 18 से 45 वर्ष की आयु में अचानक मौतें अब एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बनती जा रही हैं, जबकि पहले इसे युवाओं में दुर्लभ माना जाता था। अध्ययन में यह भी सामने आया कि अचानक मौत के मामलों में 57.2 प्रतिशत युवा वयस्क थे, जबकि 46 से 65 वर्ष की आयु के लोग 42.8 प्रतिशत रहे।

रिपोर्ट के मुताबिक जीवनशैली से जुड़े जोखिम कारक दोनों आयु समूहों में अहम भूमिका निभा रहे हैं। जिन युवाओं की अचानक मौत हुई, उनमें से आधे से अधिक धूम्रपान करते थे और 50 प्रतिशत से ज्यादा शराब का सेवन करते थे, जिनमें बड़ी संख्या नियमित शराब पीने वालों की थी। युवाओं में अचानक मौत की औसत उम्र 33.6 वर्ष पाई गई और इनमें पुरुषों की संख्या महिलाओं से कहीं अधिक रही, जहां पुरुष और महिला का अनुपात 4.5:1 दर्ज किया गया। हालांकि डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियां बुजुर्गों की तुलना में युवाओं में कम पाई गईं, फिर भी यह एक छोटे लेकिन महत्वपूर्ण हिस्से में मौजूद थीं।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि विस्तृत ऑटोप्सी जांच के बावजूद लगभग 33 प्रतिशत मामलों में मौत का सटीक कारण पता नहीं चल सका। ऐसे मामलों को अचानक बिना स्पष्ट कारण होने वाली मौत की श्रेणी में रखा गया। विश्लेषण के अनुसार अचानक मौतें साल के सभी मौसमों में हुईं, लेकिन पतझड़ और सर्दियों के महीनों में इनकी संख्या थोड़ी अधिक रही।

रिपोर्ट में बताया गया कि लगभग 40 प्रतिशत मौतें रात या तड़के सुबह के समय हुईं, जबकि 55 प्रतिशत से ज्यादा मौतें घर पर ही दर्ज की गईं। संयोग से अधिकांश मामलों की रिपोर्ट सप्ताह के मध्य, खासतौर पर बुधवार और गुरुवार को हुई। मौत से पहले सबसे आम लक्षण बेहोशी पाया गया, इसके बाद सीने में दर्द, सांस फूलना और पेट से जुड़ी समस्याएं सामने आईं।

एम्स की रिपोर्ट में यह भी स्पष्ट किया गया है कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज एक ऐसी बीमारी है जिसमें हृदय तक खून पहुंचाने वाली धमनियों में वसा और कोलेस्ट्रॉल जमा होने लगता है, जिससे धमनियां संकरी हो जाती हैं और दिल को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। इसके चलते सीने में दर्द, सांस लेने में दिक्कत और कई मामलों में अचानक हार्ट अटैक की स्थिति बन सकती है। धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, मोटापा, उच्च कोलेस्ट्रॉल और निष्क्रिय जीवनशैली इसके प्रमुख कारण माने जाते हैं।

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