अमर देव पासवान
Kulti Protest: पश्चिम बंगाल के कुलटी में स्थानीय लोगों की नौकरी की मांग को लेकर चल रहे धरने पर पुलिस ने बर्बर लाठीचार्ज किया। एक माँ को पीटते देख उसका बच्चा चीख-चीख कर रोता रहा, लेकिन थानेदार नहीं रुका। इस अमानवीय घटना से पूरे इलाके में आक्रोश है।
Kulti Protest: कुलटी में धरने पर बैठी महिलाओं पर लाठीचार्ज, माँ पर लाठियां बरसीं तो बच्चा चीखता रहा
पश्चिम बंगाल के आसनसोल के कुलटी थाना क्षेत्र में एक बेहद शर्मनाक और अमानवीय घटना सामने आई है। चिनाकुड़ी गांव में एक माँ अपने बच्चे के साथ धरने पर बैठी थी। स्थानीय लोगों की 90% नौकरियां स्थानीयों को देने की मांग पर सात दिन से शांतिपूर्ण धरना चल रहा था। लेकिन पुलिस की बर्बर कार्रवाई ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया।
Kulti Protest: कोयला खदान से पहले ही भड़का विवाद
यह विवाद उस समय बढ़ा जब इसीएल से टेंडर लेकर इन्वेटिंग प्राइवेट लिमिटेड कंपनी ने इलाके में कोयला खनन शुरू करने की प्रक्रिया शुरू की। स्थानीय लोगों ने ‘समस्त ग्राम कमिटी’ के बैनर तले यह मांग रखी थी कि खदान में 90 प्रतिशत लोगों को स्थानीय स्तर से भर्ती किया जाए।

Kulti Protest: बिना महिला पुलिस के महिलाओं पर लाठियां
घटना के अनुसार, जब महिलाएं धरने पर बैठी थीं, तो नियामतपुर पुलिस फाड़ी के प्रभारी अखिल मुखर्जी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। बिना महिला पुलिस की मौजूदगी के ही उन्होंने महिलाओं को जबरन हटाने की कोशिश की। जब महिलाएं नहीं हटीं, तो थानेदार ने लाठीचार्ज शुरू कर दिया।
माँ को पीटते देख बिलख उठा बच्चा
सबसे अमानवीय दृश्य तब देखने को मिला जब एक महिला अपनी गोद में बच्चा लिए बैठी थी और थानेदार की लाठियां उसी पर बरस रही थीं। बच्चा चीख-चीखकर रोता रहा, माँ दर्द से कराहती रही — लेकिन थानेदार की लाठियां नहीं रुकीं।

Kulti Protest: 6 आंदोलनकारी गिरफ्तार, थाने का घेराव
पुलिस ने मौके से 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जिसके बाद स्थानीय लोगों ने नियामतपुर थाने का घेराव किया और तत्काल रिहाई की मांग की। घटना की सूचना मिलते ही भाजपा नेता केशव पोद्दार मौके पर पहुंचे और उन्होंने थानेदार पर कार्रवाई की मांग करते हुए कहा:
“आंदोलन करना अपराध नहीं है, यह लोकतंत्र का अधिकार है। महिलाओं पर इस तरह की बर्बरता अस्वीकार्य है।”
Kulti Protest: जनता में उबाल, न्याय की माँग तेज
इस घटना के बाद पूरे कुलटी और आसपास के इलाकों में गुस्सा और गम का माहौल है। लोगों का कहना है कि अगर महिला पुलिस नहीं थी, तो पुरुष पुलिस को लाठीचार्ज का हक नहीं था। साथ ही एक मासूम बच्चे के सामने इस तरह की हिंसा ने मानवाधिकारों की खुली धज्जियां उड़ा दी हैं।
मांगें क्या हैं?
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आंदोलनकारियों की बिना शर्त रिहाई
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प्रभारी अखिल मुखर्जी पर कार्रवाई
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महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए महिला पुलिस बल की तैनाती
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इन्वेटिंग कंपनी में 90% स्थानीय लोगों की भर्ती का वादा
क्या कहती हैं संवैधानिक संस्थाएं?
NHRC (मानवाधिकार आयोग) और महिला आयोग को इस मामले में संज्ञान लेना चाहिए। इस तरह के कृत्य न केवल कानून के खिलाफ हैं बल्कि समाज के नैतिक ढांचे पर भी सवाल उठाते हैं।





