IndiGo Flight Emergency: दिल्ली-आइजोल फ्लाइट में अचानक बिगड़ी महिला की हालत, ऑक्सीजन लेवल 40% तक गिरा; तीन डॉक्टरों ने बचाई जान

IndiGo Flight Emergency: दिल्ली-आइजोल फ्लाइट में अचानक बिगड़ी महिला की हालत, ऑक्सीजन लेवल 40% तक गिरा; तीन डॉक्टरों ने बचाई जान

दिल्ली से आइजोल जा रही इंडिगो की एक फ्लाइट में 3 अक्टूबर को उस समय अचानक मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति बन गई, जब 32 वर्षीय एक महिला की तबीयत उड़ान के दौरान तेजी से बिगड़ गई। महिला क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित थी और इलाज के लिए दिल्ली आने के बाद वापस मिजोरम लौट रही थी। फ्लाइट में मौजूद तीन डॉक्टरों ने तुरंत मोर्चा संभाला और सीमित मेडिकल सुविधाओं के बावजूद महिला को स्थिर करने की कोशिश शुरू कर दी।

फ्लाइट के आइजोल पहुंचने में करीब एक घंटा बाकी था, तभी महिला को अचानक सांस लेने में गंभीर परेशानी होने लगी। उसकी ऑक्सीजन सैचुरेशन यानी SpO2 करीब 40 प्रतिशत तक गिर गई। स्थिति बेहद गंभीर होने के बाद केबिन क्रू ने विमान में मौजूद डॉक्टरों से मदद की अपील की।

फ्लाइट में मौजूद तीन डॉक्टरों ने तुरंत महिला की जांच शुरू की। इनमें गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. बेंजामिन खियांग्ते, पीडियाट्रिशियन और क्रिटिकल केयर सुपर स्पेशलिस्ट डॉ. एफ. रेमथांगपुई यानी अरेमी और जनरल सर्जन डॉ. विली लालहरुआइतलुआंगा शामिल थे।

इन डॉक्टरों के मदद के लिए आगे आने से पहले पूर्व केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री भागवत किशनराव कराड भी करीब 30 से 35 मिनट तक महिला की मदद कर रहे थे। जब उसकी हालत में पर्याप्त सुधार नहीं हुआ, तब केबिन क्रू की ओर से डॉक्टर की तलाश की गई और तीनों चिकित्सकों ने आगे आकर इलाज शुरू किया।

डॉक्टरों ने महिला को ऑक्सीजन दी और जरूरी दवाएं उपलब्ध कराईं। इलाज के दौरान उसकी ऑक्सीजन सैचुरेशन कुछ समय के लिए 70 से 80 प्रतिशत तक पहुंची। डॉक्टरों ने स्टेरॉयड और इनहेलर का भी इस्तेमाल किया। हालांकि सुधार ज्यादा देर तक नहीं रहा और कुछ समय बाद महिला की स्थिति फिर बिगड़ने लगी।

हालात को देखते हुए विमान के पायलट ने जरूरत पड़ने पर कोलकाता में इमरजेंसी लैंडिंग की तैयारी की थी। लेकिन उस समय महिला की ऑक्सीजन कुछ हद तक स्थिर होने के कारण फ्लाइट को आइजोल की ओर आगे ले जाने का फैसला किया गया। डॉक्टर लगातार महिला की निगरानी करते रहे।

इसके बाद महिला की हालत फिर खराब हुई और डॉक्टरों ने उसे इंट्यूबेट करने पर विचार किया। लेकिन विमान में इस प्रक्रिया के लिए जरूरी अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध नहीं थे। ऐसे में डॉक्टरों ने फ्लाइट क्रू और ग्राउंड स्टाफ से संपर्क कर आइजोल के लेंगपुई एयरपोर्ट पर एंबुलेंस और जरूरी मेडिकल सहायता तैयार रखने को कहा।

विमान के लेंगपुई एयरपोर्ट पर उतरते ही महिला को तुरंत एंबुलेंस में शिफ्ट किया गया। एयरपोर्ट पर मौजूद सुविधाओं में इंट्यूबेशन के लिए जरूरी उपकरण और एंडोट्रैकियल ट्यूब उपलब्ध थे। इसके बाद डॉक्टरों ने महिला को इंट्यूबेट किया और उसकी सांस लेने की स्थिति को स्थिर करने की कोशिश की।

इसके बाद डॉक्टरों ने आइजोल के अस्पतालों से संपर्क कर महिला के लिए ICU बेड की व्यवस्था शुरू की। काफी प्रयास के बाद LRM Hospital में ICU बेड उपलब्ध कराया गया। डॉ. रेमथांगपुई और डॉ. विली महिला के साथ एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचे, ताकि उसे रास्ते में भी जरूरी चिकित्सा सहायता मिलती रहे।

अस्पताल में महिला को वेंटिलेटर सपोर्ट दिया गया और बाद में उसकी डायलिसिस भी की गई। डॉक्टरों के मुताबिक रात तक उसकी हालत में काफी सुधार हुआ और उसे सांस लेने वाली ट्यूब से हटा दिया गया। इसके बाद वह बातचीत करने की स्थिति में भी आ गई और उसकी हालत स्थिर बताई गई।

इस पूरे घटनाक्रम में डॉक्टरों ने अपनी यात्रा की परवाह किए बिना मरीज को प्राथमिकता दी। बताया गया कि महिला को अस्पताल ले जाते समय डॉक्टरों ने अपना सामान तक विमान में छोड़ दिया था। बाद में डॉक्टरों ने मिलकर महिला के इलाज और अस्पताल पहुंचाने की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की।

यह घटना बताती है कि विमान में अचानक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी आने पर कुछ ही मिनट कितने महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सीमित मेडिकल संसाधनों के बीच डॉक्टरों की मौजूदगी, केबिन क्रू का तुरंत सहयोग, पायलट की इमरजेंसी लैंडिंग की तैयारी और एयरपोर्ट पर पहले से एंबुलेंस की व्यवस्था ने महिला को समय पर इलाज उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाई।

दिल्ली से आइजोल जा रही यह सामान्य उड़ान कुछ समय के लिए हवा में ही एक अस्थायी इमरजेंसी वार्ड में बदल गई। तीन डॉक्टरों और फ्लाइट क्रू की तत्परता ने गंभीर हालत में पहुंच चुकी महिला को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जहां आगे उसका इलाज और डायलिसिस किया गया।

 

Hot this week

Topics

spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img