Technology Democratization: पीएम मोदी बोले- तकनीक का लोकतंत्रीकरण जरूरी, समाज का कोई वर्ग पीछे न छूटे; AI और साइबर फ्रॉड पर भी जोर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को तकनीक को समावेशी और टिकाऊ विकास का माध्यम बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि तकनीक का लोकतंत्रीकरण जरूरी है, ताकि समाज का कोई भी वर्ग डिजिटल विकास की दौड़ में पीछे न रह जाए। प्रधानमंत्री ने यह बात नई दिल्ली स्थित सेवा तीर्थ में ग्लोबल सिस्टम फॉर मोबाइल कम्युनिकेशंस एसोसिएशन यानी GSMA के बोर्ड सदस्यों के साथ बातचीत के दौरान कही।
यह बैठक इंडिया मोबाइल कांग्रेस से पहले हुई, जिसमें प्रधानमंत्री ने डिजिटल तकनीक और मोबाइल कनेक्टिविटी के भविष्य को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। उन्होंने विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया कि तकनीक और डिजिटल सेवाएं केवल बड़े शहरों या विकसित अर्थव्यवस्थाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति और दुनिया के विकासशील देशों तक भी उनकी पहुंच होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल सेवाओं को किफायती और आसानी से उपलब्ध कराने की जरूरत है, खासकर ग्लोबल साउथ के देशों के लिए। उन्होंने तकनीक को अंतिम छोर यानी लास्ट माइल तक पहुंचाने पर जोर दिया, ताकि डिजिटल डिवाइड और अधिक न बढ़े। उनका कहना था कि डिजिटल विकास का वास्तविक लाभ तभी होगा, जब सामान्य नागरिक भी तकनीक का इस्तेमाल आसानी से और कम लागत में कर सके।
बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर यानी DPI की क्षमता का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे विकासशील देशों के लिए बदलाव लाने वाली व्यवस्था बताया। प्रधानमंत्री के मुताबिक, कई देशों के नेताओं के साथ DPI को लेकर हुई चर्चाओं से इसकी वैश्विक उपयोगिता सामने आई है और यह ग्लोबल साउथ के देशों के लिए डिजिटल विकास की दिशा में एक मजबूत आधार बन सकता है।
भारत में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर के जरिए डिजिटल भुगतान, पहचान और विभिन्न सरकारी सेवाओं को नागरिकों तक पहुंचाने का एक बड़ा नेटवर्क तैयार हुआ है। प्रधानमंत्री ने इसी तरह की डिजिटल व्यवस्थाओं को दूसरे विकासशील देशों के लिए भी उपयोगी बताया और कहा कि तकनीक को विकास का माध्यम बनाने के लिए इसे व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना जरूरी है।
प्रधानमंत्री ने बढ़ते डिजिटल और साइबर फ्रॉड को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए केवल पारंपरिक तरीकों पर निर्भर रहने के बजाय तकनीक आधारित समाधान विकसित करने होंगे। उन्होंने लोगों को लगातार जागरूक करने की जरूरत बताई, ताकि नागरिक फर्जी कॉल, ऑनलाइन ठगी और दूसरे डिजिटल अपराधों से सावधान रह सकें।
उन्होंने सुझाव दिया कि लोगों तक लगातार ऐसे जागरूकता संदेश पहुंचने चाहिए, जिनसे वे संभावित धोखाधड़ी वाली कॉल और ऑनलाइन फ्रॉड को पहचान सकें। डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ साइबर सुरक्षा को मजबूत करना भी जरूरी है, क्योंकि तकनीक का लाभ तभी स्थायी हो सकता है जब लोगों को डिजिटल सिस्टम पर भरोसा हो।
प्रधानमंत्री ने उभरती तकनीकों के लिए वैश्विक मानकों और साझा नियमों की आवश्यकता पर भी जोर दिया। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और दूसरी नई तकनीकों के तेजी से विस्तार के बीच उन्होंने कहा कि दुनिया को ऐसे नियमों और मानकों की जरूरत है, जिनसे तकनीक का विकास सुरक्षित और जिम्मेदार तरीके से हो सके।
AI से तैयार होने वाले कंटेंट और डीपफेक को लेकर भी प्रधानमंत्री ने महत्वपूर्ण सुझाव दिया। उन्होंने ऐसे तंत्र विकसित करने की जरूरत बताई, जिससे उपयोगकर्ता तुरंत यह पहचान सकें कि कोई फोटो, वीडियो या अन्य डिजिटल सामग्री वास्तविक है या AI की मदद से तैयार की गई है। डिजिटल दुनिया में कंटेंट की उत्पत्ति और उसकी विश्वसनीयता पहचानना आने वाले समय में बेहद महत्वपूर्ण होने वाला है।
प्रधानमंत्री ने इस दौरान तकनीक के भविष्य को अवसरों से जोड़ते हुए कहा कि डिजिटल विकास का उद्देश्य सिर्फ नई तकनीक बनाना नहीं, बल्कि उससे लोगों के लिए नए अवसर पैदा करना भी होना चाहिए। उनका जोर ऐसे डिजिटल भविष्य पर रहा जिसमें तकनीक आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ-साथ आम लोगों की जिंदगी को आसान बनाने का माध्यम बने।
GSMA बोर्ड के सदस्यों ने भी भारत के तेजी से हो रहे डिजिटल बदलाव की सराहना की। उन्होंने देश में 4G और 5G कनेक्टिविटी के विस्तार, डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, टेलीकॉम और मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र की बढ़ती क्षमता को रेखांकित किया। बोर्ड सदस्यों ने भारत की निवेश-अनुकूल नीतियों और सुरक्षित तथा भरोसेमंद डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के महत्व पर भी चर्चा की।
बैठक में भारत और वैश्विक तकनीकी क्षेत्र के बीच 5G, 6G, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, डिजिटल समावेशन और सैटेलाइट कनेक्टिविटी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर भी जोर दिया गया। इससे संकेत मिलता है कि भारत आने वाले वर्षों में केवल डिजिटल सेवाओं के बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि नई तकनीकों के विकास और वैश्विक सहयोग के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में अपनी भूमिका मजबूत करना चाहता है।
प्रधानमंत्री के साथ हुई इस बैठक में केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर, GSMA बोर्ड के सदस्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। यह चर्चा ऐसे समय हुई है जब इंडिया मोबाइल कांग्रेस का आयोजन 7 से 10 अक्टूबर तक नई दिल्ली में होने जा रहा है।
पीएम मोदी के संदेश का मुख्य फोकस साफ रहा कि डिजिटल भविष्य सिर्फ तकनीकी रूप से उन्नत नहीं, बल्कि समावेशी, सुरक्षित और भरोसेमंद भी होना चाहिए। सस्ती और सुलभ तकनीक, अंतिम व्यक्ति तक डिजिटल पहुंच, साइबर फ्रॉड से सुरक्षा और AI व डीपफेक के लिए वैश्विक मानक आने वाले डिजिटल युग की महत्वपूर्ण जरूरतें होंगी।


