AFSPA Nagaland: 9 जिलों और कई इलाकों में जारी रहेगा डिस्टर्ब्ड एरिया का दर्जा

AFSPA Nagaland: 9 जिलों और कई इलाकों में जारी रहेगा डिस्टर्ब्ड एरिया का दर्जा

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने नागालैंड के नौ जिलों और पांच अन्य जिलों के कुछ निर्धारित थाना क्षेत्रों को सशस्त्र बल विशेष अधिकार अधिनियम (AFSPA), 1958 के तहत ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ घोषित किया है। गृह मंत्रालय की 23 मार्च 2026 की अधिसूचना के मुताबिक यह व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से छह महीने की अवधि के लिए लागू की गई है, जब तक कि इसे इससे पहले वापस नहीं लिया जाता।

केंद्र सरकार ने यह फैसला नागालैंड की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा के बाद लिया। अधिसूचना में कहा गया है कि पहले भी राज्य के नौ जिलों और पांच अन्य जिलों के 21 पुलिस थाना क्षेत्रों को छह महीने के लिए डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित किया गया था। नई समीक्षा के बाद इसी व्यवस्था को अगले छह महीने के लिए जारी रखा गया।

जिन नौ जिलों को डिस्टर्ब्ड एरिया के दायरे में रखा गया है, उनमें दीमापुर, निउलैंड, चुमौकेदिमा, मोन, किफिरे, नोकलाक, फेक, पेरेन और मेलुरी शामिल हैं। इन जिलों के अतिरिक्त कोहिमा, मोकोकचुंग, लॉन्गलेंग, वोखा और जुन्हेबोटो जिलों के कुछ निर्धारित थाना क्षेत्रों को भी अधिसूचना के तहत इस श्रेणी में रखा गया है।

कोहिमा जिले में खुजामा, कोहिमा नॉर्थ, कोहिमा साउथ, जुब्जा और केजोचा पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र वाले क्षेत्रों को अधिसूचना में शामिल किया गया है। मोकोकचुंग जिले में मंगकोलेम्बा, मोकोकचुंग-I, लॉन्गथो, तुली, लॉन्गचेम और अनाकी ‘C’ पुलिस स्टेशन के क्षेत्र इसके दायरे में हैं।

इसी तरह लॉन्गलेंग जिले में यांगलोक पुलिस स्टेशन का क्षेत्र, वोखा जिले में भंडारी, चाम्पांग और रालन पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र तथा जुन्हेबोटो जिले में घटाशी, पुग्गोबोटो, सताखा, सुरूहोटो, जुन्हेबोटो और अघुनाटो पुलिस स्टेशन के क्षेत्र को भी डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित किया गया है।

AFSPA के तहत किसी क्षेत्र को ‘डिस्टर्ब्ड एरिया’ घोषित करने की कानूनी व्यवस्था अधिनियम की धारा 3 में दी गई है। केंद्र सरकार या संबंधित राज्य प्राधिकरण, कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए अधिसूचना जारी कर किसी क्षेत्र को इस श्रेणी में रख सकता है। ऐसे क्षेत्र में अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार सशस्त्र बलों को नागरिक प्रशासन की सहायता में कुछ विशेष अधिकार प्राप्त होते हैं।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना में नागालैंड की कानून-व्यवस्था की स्थिति की समीक्षा को फैसले का आधार बताया गया है। इसका मतलब यह है कि केंद्र ने पहले से लागू व्यवस्था की समीक्षा के बाद संबंधित क्षेत्रों में AFSPA की अवधि को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया। मार्च 2026 की अधिसूचना 1 अप्रैल 2026 से छह महीने के लिए प्रभावी हुई थी।

इससे पहले 26 सितंबर 2025 को जारी अधिसूचना के तहत भी नागालैंड के नौ जिलों और पांच अन्य जिलों के निर्धारित थाना क्षेत्रों को 1 अक्टूबर 2025 से छह महीने के लिए डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित किया गया था। मार्च 2026 की नई अधिसूचना उसी व्यवस्था की अगली समीक्षा के बाद जारी की गई।

नागालैंड में AFSPA का इस्तेमाल लंबे समय से सुरक्षा और उग्रवाद संबंधी चुनौतियों के संदर्भ में किया जाता रहा है। किसी क्षेत्र को डिस्टर्ब्ड घोषित किए जाने का उद्देश्य केंद्र सरकार के अनुसार वहां सुरक्षा बलों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए कानूनी अधिकार उपलब्ध कराना है। इस व्यवस्था की समीक्षा समय-समय पर की जाती है और अधिसूचना में तय अवधि पूरी होने पर इसे आगे बढ़ाने, संशोधित करने या वापस लेने का निर्णय लिया जा सकता है।

केंद्र के इस फैसले से नागालैंड के उन इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था के लिए AFSPA के प्रावधान लागू बने रहते हैं जिन्हें अधिसूचना में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। वहीं, अधिसूचना में पूरे राज्य को एक साथ डिस्टर्ब्ड एरिया घोषित करने के बजाय नौ जिलों और अन्य पांच जिलों के निर्दिष्ट थाना क्षेत्रों का उल्लेख किया गया है।

इस फैसले का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव छह महीने की निर्धारित अवधि के पूरा होने पर होगा, जब केंद्र सरकार नागालैंड की कानून-व्यवस्था की स्थिति की फिर समीक्षा कर सकती है। उस समीक्षा के आधार पर मौजूदा व्यवस्था को जारी रखने, क्षेत्र में बदलाव करने या AFSPA के दायरे में परिवर्तन करने को लेकर नया निर्णय लिया जा सकता है।

 

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