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1984 Sikh Riots: 42 साल बाद दंगा पीड़ित परिवारों को राहत की पहल, पूर्वी दिल्ली में लगा विशेष कैंप

1984 Sikh Riots: 42 साल बाद दंगा पीड़ित परिवारों को राहत की पहल, पूर्वी दिल्ली में लगा विशेष कैंप

वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित परिवारों को राहत और न्याय दिलाने की दिशा में दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। इसी क्रम में पूर्वी दिल्ली स्थित डीएम/डीडीसी कार्यालय में एक विशेष कैंप आयोजित किया गया, जहां पात्र दंगा पीड़ित परिवारों के सर्वाइवरों के दस्तावेजों का सत्यापन कर उन्हें सर्वाइवर प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू की गई। यह प्रमाण-पत्र आगे सरकारी सहायता, रोजगार और अन्य लाभ प्राप्त करने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण दस्तावेज के रूप में उपयोग किया जाएगा।

सरकार की घोषणा के अनुसार, वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों से प्रभावित उन परिवारों को, जिनका नाम संबंधित एफआईआर में दर्ज है और जिन्हें उस समय पांच लाख रुपये की सहायता राशि दी गई थी, उनके परिवार के एक पात्र सदस्य को दिल्ली सरकार में नौकरी देने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसके लिए संबंधित परिवार के प्रथम, द्वितीय अथवा पात्र पौत्र-पौत्री (ग्रैंडचिल्ड्रेन) को आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन के बाद सर्वाइवर प्रमाण-पत्र जारी किया जाएगा।

यदि किसी परिवार में एक से अधिक पात्र सर्वाइवर हैं, तो परिवार की ओर से नामित व्यक्ति को अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी) के आधार पर सरकारी नौकरी का लाभ दिया जाएगा। विशेष कैंप में बड़ी संख्या में दंगा पीड़ित परिवार पहुंचे और आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सत्यापन की प्रक्रिया पूरी की।

कैंप में मौजूद अधिकारियों ने बताया कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ संचालित की जा रही है, ताकि केवल पात्र लाभार्थियों को ही सरकार द्वारा घोषित सुविधाओं का लाभ मिल सके। सर्वाइवर प्रमाण-पत्र जारी होने के बाद रोजगार और अन्य सरकारी सहायता से संबंधित आगे की औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी।

इस अवसर पर कृष्णा नगर के विधायक एवं दिल्ली जिला विकास समिति (डीडीसी) के चेयरमैन डॉ. अनिल गोयल भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि वर्ष 1984 की हिंसा ने हजारों सिख परिवारों को गहरे जख्म दिए थे और लंबे समय तक प्रभावित परिवार न्याय एवं सम्मानजनक सहायता की प्रतीक्षा करते रहे। उन्होंने कहा कि करीब 42 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाने की दिशा में ठोस कदम उठाया गया है।

कैंप में पहुंचे कई दंगा पीड़ित परिवारों ने इस पहल को वर्षों पुराने दर्द को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उनका कहना था कि लंबे समय बाद उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना गया है और अब उन्हें उम्मीद है कि सरकार द्वारा घोषित सहायता और रोजगार का लाभ वास्तव में पात्र परिवारों तक पहुंचेगा।

 

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