Cyber Crime: नौकरी का सपना दिखाकर ठगी का जाल, नोएडा से पांच साइबर जालसाज गिरफ्तार
नोएडा साइबर क्राइम पुलिस ने नौकरी और प्रशिक्षण दिलाने के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी करने वाले एक साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने सेक्टर-63 से गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों पर युवाओं का डेटा चोरी कर उन्हें नामी कंपनियों में नौकरी और ट्रेनिंग दिलाने का झांसा देकर पैसे ऐंठने का आरोप है।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी अलग-अलग कंपनियों का डेटा हासिल कर नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को फोन करते थे। इसके बाद उन्हें बड़ी कंपनियों में नौकरी दिलाने या प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल कराने का लालच दिया जाता था। आरोपी रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क के नाम पर लोगों से पैसे लेते थे।
डीसीपी साइबर शैव्या गोयल ने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण और गोपनीय सूचना के आधार पर साइबर क्राइम पुलिस टीम ने सेक्टर-63 में कार्रवाई की। इस दौरान गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने नौकरी और ट्रेनिंग के नाम पर लोगों से ठगी करने की बात कबूल की है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान एटा निवासी आदित्य चौहान, दिल्ली निवासी सुमित कुमार, कानपुर निवासी सूरज गुप्ता, फिरोजाबाद निवासी रिषभ और सुल्तानपुर निवासी गौरव पाठक के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह के खिलाफ उत्तर प्रदेश, बिहार और महाराष्ट्र में पांच शिकायतें पहले से दर्ज हैं।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से नौ मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, 17 सिम कार्ड, चार डेबिट कार्ड, दो कंपनी की मोहर, चेक बुक, पासबुक और कॉलिंग डेटा बरामद किया है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य सदस्यों और इनके बैंक खातों की जानकारी जुटाने में लगी है।
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपियों ने कम उम्र में ही साइबर ठगी का काम शुरू कर दिया था। गिरफ्तार पांचों आरोपी 19 से 23 वर्ष की आयु के हैं। इनमें से आदित्य चौहान और सूरज गुप्ता बीसीए पास हैं। रिषभ बीएससी, गौरव पाठक बीए पास हैं, जबकि सुमित कुमार ने 12वीं तक पढ़ाई की है।
पुलिस के अनुसार, आरोपी युवाओं को निशाना बनाने के लिए पहले उनका मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत जानकारी जुटाते थे। इसके बाद अलग-अलग मोबाइल नंबर और सिम कार्ड का इस्तेमाल कर कॉल करते थे। बातचीत के दौरान बड़ी कंपनियों में नौकरी या ट्रेनिंग का भरोसा दिलाकर उनसे पैसे वसूलते थे।
इस तरह करते थे ठगी
आरोपी दूसरी कंपनियों का डेटा चोरी कर नौकरी तलाश रहे युवाओं की जानकारी जुटाते थे। इसके बाद उन्हें फोन कर नामी कंपनियों में नौकरी और ट्रेनिंग का झांसा देते थे। विश्वास में लेने के बाद रजिस्ट्रेशन और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम मांगी जाती थी। भुगतान मिलने के बाद आरोपी संपर्क बंद कर देते थे।
साइबर पुलिस का कहना है कि गिरोह के पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपियों ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और इनके साथ कौन-कौन लोग जुड़े हुए हैं।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नौकरी या प्रशिक्षण के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति को पैसे देने से पहले पूरी जानकारी की जांच करें। किसी भी संदिग्ध कॉल या ऑनलाइन ऑफर की शिकायत तुरंत साइबर पुलिस से करें।
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