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Noida Metro Extension: नोएडा-ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना को बड़ी मंजूरी, रेलवे बोर्ड से मिली एनओसी; 1.25 लाख से अधिक लोगों को होगा सीधा लाभ

Noida Metro Extension: नोएडा-ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना को बड़ी मंजूरी, रेलवे बोर्ड से मिली एनओसी; 1.25 लाख से अधिक लोगों को होगा सीधा लाभ

नोएडा। लंबे समय से प्रतीक्षित नोएडा-ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना को महत्वपूर्ण सफलता मिल गई है। रेलवे बोर्ड ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्रदान कर दिया है, जिससे इसके निर्माण का रास्ता और अधिक साफ हो गया है। अब अगले चार से पांच दिनों के भीतर परियोजना की उपयोगिता और आर्थिक व्यवहार्यता को पब्लिक इनवेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा। यदि वहां से मंजूरी मिल जाती है तो परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट (डीपीआर) को केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) को अंतिम स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।

नोएडा मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एनएमआरसी) के प्रबंध निदेशक कृष्णा करुणेश ने जानकारी देते हुए बताया कि रेलवे बोर्ड से एनओसी मिलना परियोजना के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि अब शेष औपचारिक मंजूरियां प्राप्त करने की प्रक्रिया तेज गति से आगे बढ़ेगी। इसके लिए वे स्वयं दिल्ली जाकर पीआईबी के अधिकारियों के समक्ष परियोजना की आवश्यकता, लाभ और भविष्य की संभावनाओं को प्रस्तुत करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद जल्द ही निर्माण कार्य के लिए टेंडर जारी किए जा सकेंगे।

इस परियोजना के तहत सेक्टर-51 से ग्रेटर नोएडा वेस्ट के सेक्टर-4 स्थित किसान चौक तक लगभग 7.5 किलोमीटर लंबा मेट्रो कॉरिडोर विकसित किया जाएगा। वर्तमान में इस परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 900 करोड़ रुपये बताई जा रही है। एनएमआरसी ने इस कॉरिडोर पर पांच नए मेट्रो स्टेशन विकसित करने की योजना बनाई है, जिनमें सेक्टर-61, सेक्टर-70, सेक्टर-122, सेक्टर-123 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4 (किसान चौक) शामिल हैं।

यह नया मेट्रो कॉरिडोर नोएडा और ग्रेटर नोएडा वेस्ट के बीच सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करेगा। खास बात यह है कि यह परियोजना भविष्य में प्रस्तावित गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक के रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (आरआरटीएस) नेटवर्क से भी जुड़ सकेगी। इससे यात्रियों को मेट्रो और आरआरटीएस के माध्यम से सीधे जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचने में सुविधा मिलेगी।

परियोजना के लागू होने के बाद नोएडा, ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गाजियाबाद और दिल्ली के बीच आवागमन पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान और तेज हो जाएगा। वर्तमान में ग्रेटर नोएडा वेस्ट के लाखों निवासी रोजाना नौकरी, व्यापार और अन्य कार्यों के लिए नोएडा तथा दिल्ली का रुख करते हैं। उन्हें ट्रैफिक जाम और सीमित सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं के कारण काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। मेट्रो विस्तार के बाद इन समस्याओं में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

अधिकारियों के अनुसार, इस परियोजना के निर्माण में लगभग दो वर्षों का समय लग सकता है। हालांकि इसके पूरा होने के बाद क्षेत्र में एक मजबूत परिवहन लूप तैयार होगा, जिससे नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और दिल्ली के बीच कनेक्टिविटी का नया नेटवर्क विकसित होगा। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा बल्कि सड़क यातायात का दबाव भी घटेगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस मेट्रो कॉरिडोर से प्रत्यक्ष रूप से करीब 1.25 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। ग्रेटर नोएडा वेस्ट, गौड़ चौक, किसान चौक और आसपास के सेक्टरों में रहने वाले लोगों को बेहतर सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध होगी। इसके साथ ही निजी वाहनों पर निर्भरता कम होगी और ट्रैफिक जाम की समस्या में भी कमी आएगी।

परियोजना के वित्तपोषण के लिए केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, नोएडा प्राधिकरण और ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण संयुक्त रूप से निवेश करेंगे। इक्विटी मॉडल के तहत सभी एजेंसियां अपनी-अपनी हिस्सेदारी के अनुसार धनराशि उपलब्ध कराएंगी। अधिकारियों को उम्मीद है कि सभी आवश्यक मंजूरियां मिलने के बाद यह परियोजना क्षेत्र के विकास और यातायात व्यवस्था में एक नया अध्याय जोड़ने का काम करेगी।

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