पश्चिम बंगाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल: भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मिले TMC के बागी सांसद, सीएम शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद

पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल: भाजपा नेता भूपेंद्र यादव से मिले TMC के बागी सांसद, सीएम शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तेजी से बदलते घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई नेताओं और सांसदों की गतिविधियों ने राजनीतिक गलियारों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। राजधानी दिल्ली में भाजपा नेता भूपेंद्र यादव के आवास पर हुई एक महत्वपूर्ण बैठक ने राज्य की राजनीति का तापमान बढ़ा दिया है।

जानकारी के अनुसार, इस बैठक में टीएमसी के कई बागी सांसद और नेता शामिल हुए। बैठक में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की मौजूदगी भी चर्चा का विषय बनी रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बैठक आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति की दिशा तय कर सकती है।

बैठक में जिन नेताओं के नाम सामने आए हैं, उनमें काकली घोष दस्तीदार, प्रसून बनर्जी, शताब्दी रॉय, असीत माल, बापी हलदार, जून मालिया, जगदीश बसुनिया, कालीपदा सोरेन, अरूप चक्रवर्ती, पार्थ भौमिक, शर्मिला सरकार और अन्य नेताओं के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

इस बीच राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने भी टीएमसी से इस्तीफा देकर राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। अपने इस्तीफा पत्र में उन्होंने पार्टी पर भ्रष्टाचार, महिलाओं के उत्पीड़न और प्रशासनिक विफलताओं के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून व्यवस्था के मुद्दों पर पार्टी को नकार दिया है।

सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने पत्र में भाजपा सरकार की भी सराहना की और दावा किया कि राज्य के विकास और पुनर्निर्माण के लिए नई सरकार कई योजनाओं पर काम कर रही है।

राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, टीएमसी के कई असंतुष्ट सांसद और विधायक भविष्य में भाजपा का दामन थाम सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। दूसरी ओर, टीएमसी नेतृत्व स्थिति पर नजर बनाए हुए है और पार्टी में बढ़ती असंतोष की खबरों के बीच नुकसान को सीमित करने की कोशिश कर रहा है।

दिलचस्प बात यह है कि जिस समय दिल्ली में यह बैठक चल रही थी, उसी दौरान टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी और वरिष्ठ नेता अभिषेक बनर्जी भी राष्ट्रीय स्तर की राजनीतिक बैठकों के सिलसिले में दिल्ली में मौजूद थे। ऐसे में आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

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