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Ayush Ministry: BHASHINI तकनीक से अब 22 भारतीय भाषाओं में मिलेंगी आयुष सेवाएं, डिजिटल हेल्थ सिस्टम होगा और मजबूत

Ayush Ministry: BHASHINI तकनीक से अब 22 भारतीय भाषाओं में मिलेंगी आयुष सेवाएं, डिजिटल हेल्थ सिस्टम होगा और मजबूत

नई दिल्ली, 14 मई : देशभर के लोगों तक आयुष सेवाओं को उनकी मातृभाषा में पहुंचाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। आयुष मंत्रालय ने डिजिटल इंडिया भाषिणी डिवीजन (BHASHINI) के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस पहल के तहत अब आयुष मंत्रालय की डिजिटल सेवाएं संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराई जाएंगी।

सरकार की इस नई पहल का उद्देश्य देश के हर नागरिक तक भारतीय पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों की जानकारी को आसान और सुलभ बनाना है। इसके तहत आयुष ग्रिड से जुड़े पोर्टल, मोबाइल एप्लिकेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित प्लेटफॉर्म में भाषिणी की आधुनिक अनुवाद, वॉयस और स्पीच तकनीकों को जोड़ा जाएगा। इससे लोग अपनी भाषा में आयुर्वेद, योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध, सोवा-रिग्पा और होम्योपैथी जैसी आयुष प्रणालियों से संबंधित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।

आयुष मंत्रालय का मानना है कि भाषा की बाधा हटने से देश के दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों के लोग भी डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं से आसानी से जुड़ पाएंगे। यह पहल डिजिटल इंडिया मिशन को भी मजबूती देगी और स्वास्थ्य सेवाओं में समान पहुंच सुनिश्चित करेगी।

आयुष सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने इस समझौते को भारतीय चिकित्सा ज्ञान को आम जनता तक पहुंचाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां केवल कुछ भाषाओं तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि देश के हर नागरिक को अपनी भाषा में इनका लाभ मिलना चाहिए। यह पहल भारतीय ज्ञान परंपरा को नई तकनीक के साथ जोड़ने का मजबूत उदाहरण बनेगी।

वहीं, भाषिणी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी अमिताभ नाग ने कहा कि भाषा आधारित एआई तकनीक देश में डिजिटल समावेशन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि जब नागरिक अपनी भाषा में सेवाएं प्राप्त करते हैं तो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनका भरोसा और उपयोग दोनों बढ़ता है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह साझेदारी भारत में अधिक समावेशी, आधुनिक और नागरिक-केंद्रित आयुष डिजिटल हेल्थ सिस्टम तैयार करने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी। आने वाले समय में इससे लाखों लोगों को उनकी भाषा में बेहतर स्वास्थ्य जानकारी और सेवाएं उपलब्ध हो सकेंगी।

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