
ICGS Achal: भारतीय तटरक्षक बल में शामिल हुआ नया फास्ट पेट्रोल वेसल, समुद्री सुरक्षा होगी और मजबूत
नई दिल्ली, 9 मई: भारतीय समुद्री सुरक्षा ढांचे को और मजबूत करते हुए भारतीय तटरक्षक बल (Indian Coast Guard) में नया स्वदेशी फास्ट पेट्रोल वेसल ‘आईसीजीएस अचल’ शामिल कर लिया गया है। यह अत्याधुनिक पोत शुक्रवार को गोवा शिपयार्ड लिमिटेड में औपचारिक रूप से कमीशन किया गया, जिससे देश की तटीय सुरक्षा क्षमताओं को नई ताकत मिली है।
इस पोत को रक्षा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव एवं महानिदेशक (अधिग्रहण) ए. अंबरासु ने सेवा में शामिल किया। ‘अचल’ का अर्थ दृढ़ और अडिग होता है, जो भारतीय तटरक्षक बल की समुद्री सीमाओं की सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह नया फास्ट पेट्रोल वेसल स्वदेशी तकनीक से तैयार किया गया है और इसे Goa Shipyard Limited ने डिजाइन और निर्मित किया है। लगभग 51 मीटर लंबे इस पोत में 50 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी उपकरणों का उपयोग किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को मजबूती देता है।
अदम्य-श्रेणी के इस पोत में दो 3000 किलोवाट क्षमता वाले डीजल इंजन लगाए गए हैं, जिससे यह 27 नॉट की अधिकतम गति से चल सकता है और लगभग 1500 समुद्री मील तक लगातार संचालन करने में सक्षम है। इसमें आधुनिक कंट्रोलेबल पिच प्रोपेलर, इंटीग्रेटेड ब्रिज सिस्टम, मशीनरी कंट्रोल सिस्टम और ऑटोमेटेड पावर मैनेजमेंट सिस्टम जैसी उन्नत तकनीकें शामिल हैं।
सुरक्षा के लिहाज से इस पोत में 30 मिमी CRN-91 गन और दो 12.7 मिमी स्टेबलाइज्ड रिमोट कंट्रोल गन लगाए गए हैं। साथ ही उन्नत फायर कंट्रोल और टारगेट डिटेक्शन सिस्टम इसे समुद्री खतरों से निपटने में बेहद सक्षम बनाते हैं।
‘आईसीजीएस अचल’ को गुजरात के वाडिनार में तैनात किया जाएगा और यह उत्तर-पश्चिम तटरक्षक क्षेत्र के अंतर्गत कार्य करेगा। इसका मुख्य काम समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान, तस्करी रोधी कार्रवाई, प्रदूषण नियंत्रण और अन्य आपात समुद्री मिशनों में सहायता प्रदान करना होगा।
इस पोत की कमान कमांडेंट (जूनियर ग्रेड) नवीन कुमार के नेतृत्व में रहेगी, जिसमें कुल 5 अधिकारी और 34 कर्मियों का दल तैनात रहेगा।
भारतीय तटरक्षक बल के अनुसार, इस नए पोत का शामिल होना बेड़े के विस्तार और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे देश की तटीय निगरानी और परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।





