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TARA Test Success: ‘तारा’ टेस्ट सफल, अब दुश्मन पर और सटीक होगा भारत का हमला

TARA Test Success: ‘तारा’ टेस्ट सफल, अब दुश्मन पर और सटीक होगा भारत का हमला

नई दिल्ली। भारत ने स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। Defence Research and Development Organisation और Indian Air Force के संयुक्त प्रयास से विकसित ‘टैक्टिकल एडवांस्ड रेंज ऑगमेंटेशन’ यानी ‘तारा’ हथियार प्रणाली का पहला सफल उड़ान परीक्षण किया गया है। इस सफलता को भारत की आधुनिक युद्ध क्षमता और स्वदेशी रक्षा तकनीक के लिए बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह परीक्षण 7 मई को Odisha तट के पास किया गया। परीक्षण के दौरान हथियार प्रणाली ने तय मानकों के अनुसार प्रदर्शन किया और लक्ष्य पर सटीक प्रहार क्षमता दिखाई। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यह तकनीक भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा सकती है और भविष्य के युद्ध अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

‘तारा’ भारत का पहला स्वदेशी ग्लाइड वेपन सिस्टम है, जिसे विशेष रूप से सामान्य यानी अनगाइडेड बमों को अत्याधुनिक प्रिसिजन गाइडेड हथियारों में बदलने के लिए विकसित किया गया है। इस तकनीक की मदद से पारंपरिक बम अब अधिक दूरी से और अत्यधिक सटीकता के साथ दुश्मन के ठिकानों को निशाना बना सकेंगे। इससे युद्ध के दौरान कम लागत में अधिक प्रभावी हमले संभव होंगे।

इस मॉड्यूलर रेंज एक्सटेंशन किट को Research Centre Imarat और डीआरडीओ की अन्य प्रयोगशालाओं ने मिलकर विकसित किया है। वैज्ञानिकों ने इसे इस तरह डिजाइन किया है कि इसे अलग-अलग प्रकार के वारहेड्स और बमों के साथ इस्तेमाल किया जा सके। इससे भारतीय सेना और वायुसेना को ऑपरेशन के दौरान अधिक लचीलापन और रणनीतिक बढ़त मिलेगी।

रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक युद्ध में प्रिसिजन गाइडेड हथियारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे हथियार दुश्मन के सैन्य ठिकानों, बंकरों और रणनीतिक लक्ष्यों पर बेहद सटीक हमला करने में सक्षम होते हैं। ‘तारा’ प्रणाली के सफल परीक्षण से भारत उन चुनिंदा देशों की सूची में और मजबूती से शामिल हो गया है जिनके पास अत्याधुनिक स्वदेशी स्मार्ट हथियार तकनीक मौजूद है।

इस परियोजना में भारतीय रक्षा उद्योगों और डेवलपमेंट-कम-प्रोडक्शन पार्टनरों की भी अहम भागीदारी रही। अधिकारियों के अनुसार, अब इसकी उत्पादन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इससे देश में रक्षा विनिर्माण को बढ़ावा मिलेगा और ‘मेक इन इंडिया’ अभियान को नई मजबूती मिलेगी।

रक्षा मंत्री Rajnath Singh ने इस सफलता को भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता की दिशा में बड़ा कदम बताया। वहीं डीआरडीओ प्रमुख Samir V. Kamat ने वैज्ञानिकों, इंजीनियरों और भारतीय वायुसेना की टीम को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह सफलता देश की रक्षा तकनीक को भविष्य के लिए और मजबूत बनाएगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में ‘तारा’ जैसी तकनीकें भारतीय सैन्य अभियानों की रणनीति बदल सकती हैं। इससे दुश्मन के ठिकानों पर लंबी दूरी से सटीक हमले करना आसान होगा और सैन्य संसाधनों का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सकेगा।

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संवाददाता

Priyanka Singh

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