Consumer Court : मरीज को भर्ती करना है या नहीं, फैसला डॉक्टर करेंगे; बीमा कंपनी को क्लेम चुकाने का आदेश

Consumer Court : मरीज को भर्ती करना है या नहीं, फैसला डॉक्टर करेंगे; बीमा कंपनी को क्लेम चुकाने का आदेश
नोएडा जिला उपभोक्ता आयोग ने स्वास्थ्य बीमा से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए कहा है कि किसी मरीज को अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत है या नहीं, इसका निर्णय चिकित्सक करेंगे, न कि बीमा कंपनी। आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी इलाज को केवल ओपीडी में संभव बताकर क्लेम देने से इनकार नहीं कर सकती। इस फैसले के साथ आयोग ने इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को मरीज के इलाज का पूरा खर्च ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर चुकाने का आदेश दिया है।
यह मामला बुलंदशहर निवासी अजय कुमार से जुड़ा है, जिन्होंने स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली हुई थी। उनकी हेल्थ पॉलिसी 12 दिसंबर 2023 तक वैध थी। शिकायत के अनुसार 30 अक्टूबर 2023 को अजय कुमार की तबीयत अचानक बिगड़ गई। उन्हें तेज बुखार, उल्टी और पेशाब करने में गंभीर परेशानी होने लगी, जिसके बाद परिवार उन्हें इलाज के लिए नोएडा के कैलाश अस्पताल लेकर पहुंचा। डॉक्टरों ने उनकी हालत को देखते हुए तुरंत अस्पताल में भर्ती कर लिया।
अस्पताल प्रशासन ने इलाज के लिए करीब 56 हजार रुपये के अनुमानित खर्च के साथ बीमा कंपनी को कैशलेस इलाज की मंजूरी के लिए अनुरोध भेजा। आरोप है कि बीमा कंपनी ने इस अनुरोध को अस्वीकार कर दिया। इसके बाद अस्पताल की ओर से दोबारा पुनर्विचार के लिए अनुरोध भेजा गया, लेकिन कंपनी ने फिर से क्लेम मंजूर करने से इंकार कर दिया। मजबूरी में मरीज और उसके परिवार को इलाज का पूरा खर्च खुद वहन करना पड़ा।
बीमा कंपनी की सेवा से असंतुष्ट होकर अजय कुमार ने जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी की ओर से तर्क दिया गया कि मरीज को जिस बीमारी के लिए भर्ती किया गया था, उसका इलाज ओपीडी में भी संभव था। कंपनी का कहना था कि अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता नहीं थी, इसलिए कैशलेस सुविधा नहीं दी गई।
मामले की सुनवाई जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष अनिल कुमार पुंडीर और सदस्य अंजु शर्मा की पीठ ने की। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आयोग ने माना कि मरीज को भर्ती करने का निर्णय डॉक्टरों द्वारा चिकित्सा स्थिति को देखते हुए लिया गया था और बीमा कंपनी इस पर अपनी अलग राय देकर क्लेम खारिज नहीं कर सकती।
आयोग ने अपने आदेश में इफको टोकियो जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड को निर्देश दिया कि वह 62,930 रुपये की क्लेम राशि छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित 30 दिनों के भीतर अदा करे। इसके अलावा कंपनी को दो हजार रुपये वाद व्यय और दो हजार रुपये मानसिक प्रताड़ना के लिए भी देने होंगे।
उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े जानकारों का मानना है कि यह फैसला स्वास्थ्य बीमा लेने वाले लाखों लोगों के लिए राहत देने वाला है। इससे बीमा कंपनियों द्वारा मनमाने तरीके से क्लेम खारिज करने के मामलों पर रोक लगाने में मदद मिल सकती है।





