DRDO Armoured Platform: डीआरडीओ ने पेश किए उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म, सेना की ताकत होगी और मजबूत

नई दिल्ली। स्वदेशी रक्षा तकनीक को नई दिशा देते हुए रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने उन्नत बख्तरबंद प्लेटफॉर्म (ट्रैक्ड और व्हील्ड) का अनावरण किया है। इन अत्याधुनिक प्लेटफॉर्म के शामिल होने से भारतीय सशस्त्र बलों की मारक क्षमता और ऑपरेशनल दक्षता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है।
इन प्लेटफॉर्म को वाहन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा विकसित किया गया है और महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित डीआरडीओ परिसर में आयोजित कार्यक्रम में डीआरडीओ अध्यक्ष डॉ समीर वी कामत ने इन्हें प्रस्तुत किया। वर्तमान में इन प्लेटफॉर्म में करीब 65 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक करने का लक्ष्य रखा गया है।
दोनों प्लेटफॉर्म में स्वदेशी रूप से विकसित 30 मिमी क्रू-लेस टर्रेट लगाया गया है, जो आधुनिक युद्ध की जरूरतों के अनुरूप है। इसमें 7.62 मिमी पीकेटी गन और एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल लॉन्च करने की क्षमता भी शामिल है, जिससे इसकी मारक क्षमता और बढ़ जाती है।
इन वाहनों में उच्च क्षमता वाले इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन दिया गया है, जिससे बेहतर पावर-टू-वेट रेशियो, तेज गति और कठिन भूभाग पर भी आसानी से संचालन संभव हो पाता है। साथ ही स्तानग स्तर-4 और 5 की सुरक्षा, मॉड्यूलर ब्लास्ट और बैलिस्टिक प्रोटेक्शन जैसी उन्नत सुरक्षा सुविधाएं भी दी गई हैं।
खास बात यह है कि ये प्लेटफॉर्म एम्फीबियस क्षमता से लैस हैं, यानी पानी में भी आसानी से संचालन कर सकते हैं। हाइड्रो-जेट तकनीक के जरिए ये नदियों और जल बाधाओं को पार करने में सक्षम हैं, जिससे सेना की ऑपरेशनल लचीलापन काफी बढ़ जाता है।
इन प्लेटफॉर्म का बेस डिजाइन मल्टी-रोल उपयोग के लिए तैयार किया गया है, जिसे अलग-अलग सैन्य जरूरतों के अनुसार कॉन्फिगर किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता को और मजबूत करेगा और भविष्य के युद्ध परिदृश्यों में सेना को तकनीकी बढ़त दिलाएगा।





