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Digital Arrest Scam Noida: 6 दिन तक साइबर ठगों के जाल में फंसी रहीं बुजुर्ग महिलाएं और MBBS छात्रा, पड़ोसी की सतर्कता से बचीं

Digital Arrest Scam Noida: 6 दिन तक साइबर ठगों के जाल में फंसी रहीं बुजुर्ग महिलाएं और MBBS छात्रा, पड़ोसी की सतर्कता से बचीं

Noida के सेक्टर-74 स्थित Supertech Capetown सोसायटी में डिजिटल अरेस्ट का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां साइबर ठगों ने दो बुजुर्ग महिलाओं और एक एमबीबीएस छात्रा को छह दिनों तक अपने जाल में फंसा कर रखा। समय रहते पड़ोसियों की सतर्कता के चलते तीनों को इस ठगी से बचाया जा सका।

जानकारी के अनुसार, दोनों बुजुर्ग महिलाएं बहनें हैं और सामान्य दिनों में रोज सुबह-शाम सोसायटी में टहलने और पड़ोसियों से मिलने-जुलने जाती थीं। लेकिन अचानक छह दिनों तक उनके बाहर न निकलने और किसी से संपर्क न करने पर पड़ोसियों को शक हुआ। इसके बाद मामले की जानकारी सोसायटी के एओए (अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन) को दी गई।

एओए टीम सिक्योरिटी स्टाफ के साथ फ्लैट पर पहुंची और काफी देर तक दरवाजा खटखटाने के बाद अंदर से दरवाजा खुलवाया गया। अंदर का दृश्य देखकर सभी हैरान रह गए—तीनों महिलाएं बेहद डरी और सहमी हुई थीं। कुछ समय बाद उन्होंने बताया कि वे साइबर ठगों के ‘डिजिटल अरेस्ट’ के जाल में फंसी हुई थीं।

पीड़ितों के अनुसार, साइबर ठगों ने उन्हें लगातार फोन और वीडियो कॉल के जरिए धमकाया और डराया। इस दौरान ठग एक लाख रुपये उनसे वसूल चुके थे और दो लाख रुपये की और मांग कर रहे थे। बताया गया कि बड़ी बहन केंद्र सरकार के कृषि और शहरी विकास मंत्रालय से रिटायर्ड हैं, जबकि छोटी बहन की बेटी दिल्ली के एक कॉलेज में एमबीबीएस की छात्रा है।

चौंकाने वाली बात यह रही कि डिजिटल अरेस्ट के दौरान भी छात्रा अपने कॉलेज में प्रैक्टिकल देने दो बार गई। इस दौरान उसकी मां उसे कार से कॉलेज छोड़ने जाती थी, लेकिन साइबर ठग फोन के जरिए उन्हें लगातार निगरानी में रखते थे। जब छात्रा कॉलेज के अंदर जाती थी, तब भी मां को कार में ‘डिजिटल अरेस्ट’ की स्थिति में रखा जाता था। यहां तक कि छात्रा को पढ़ाई भी ठगों के सामने ही करनी पड़ रही थी।

एओए टीम जब फ्लैट में पहुंची, उस समय भी ठग फोन पर मौजूद थे। टीम ने तुरंत फोन कट करवाया, पीड़ितों को समझाया और पुलिस को सूचना दी। मामले में Sector 113 Police Station में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और जांच शुरू कर दी गई है।

एओए अध्यक्ष प्रवीण भारद्वाज के अनुसार, यदि समय रहते पड़ोसियों ने सतर्कता नहीं दिखाई होती, तो ठग और बड़ी रकम वसूल सकते थे।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि साइबर अपराधी किस तरह मानसिक दबाव और डर का इस्तेमाल कर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं। ऐसे मामलों में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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