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Noida District Hospital Crisis: डेढ़ महीने से इम्प्लांट सर्जरी बंद, गरीब मरीज इलाज के लिए दिल्ली-ग्रेटर नोएडा भटकने को मजबूर

Noida District Hospital Crisis: डेढ़ महीने से इम्प्लांट सर्जरी बंद, गरीब मरीज इलाज के लिए दिल्ली-ग्रेटर नोएडा भटकने को मजबूर

उत्तर प्रदेश के उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नोएडा सेक्टर-39 स्थित जिला अस्पताल में पिछले करीब डेढ़ महीने से इम्प्लांट सर्जरी बंद होने के कारण गरीब और जरूरतमंद मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली और ग्रेटर नोएडा के बड़े अस्पतालों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

यह अस्पताल, जो लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था और 35 लाख से अधिक आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं देने का दावा करता है, वहां ऑर्थोपैडिक विभाग में इम्प्लांट सर्जरी ठप होने से मरीजों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। पहले जहां हड्डी से जुड़े मरीजों की नियमित सर्जरी यहीं की जाती थी, अब उन्हें निजी और महंगे अस्पतालों में इलाज कराना पड़ रहा है।

अस्पताल में तीन ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ तैनात हैं और रोजाना 250 से 300 मरीज ओपीडी में परामर्श लेने आते हैं, लेकिन 18 फरवरी से इम्प्लांट सर्जरी बंद होने के कारण गंभीर मरीजों को ऑपरेशन की सुविधा नहीं मिल पा रही है। कई मरीजों को दर्द और गंभीर चोट के बावजूद वापस लौटा दिया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार पहले अस्पताल में चौथे तल पर बने सर्जरी कक्ष में नियमित रूप से इम्प्लांट सर्जरी होती थी, लेकिन किसी शिकायत के बाद यह प्रक्रिया रोक दी गई। इसके बाद से मरीजों की परेशानी कई गुना बढ़ गई है। मरीजों का आरोप है कि उन्हें या तो ऑपरेशन के लिए निजी अस्पताल भेजा जा रहा है या फिर लंबे समय तक इंतजार करने को कहा जा रहा है।

छलेरा निवासी गणेश सिंह के मामले ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। 10 फरवरी को गिरने से घायल हुए गणेश सिंह को 12 फरवरी को ऑपरेशन की तारीख दी गई थी, लेकिन आरोप है कि डॉक्टरों ने उनसे ऑपरेशन के लिए पैसे की मांग की और बाद में प्रक्रिया टाल दी गई। बाद में उन्हें ग्रेटर नोएडा के निजी मेडिकल कॉलेज में जाकर महंगे खर्च पर सर्जरी करानी पड़ी।

इसी तरह कई अन्य मरीजों ने भी आरोप लगाया है कि उन्हें या तो ऑपरेशन से मना कर दिया गया या फिर उन्हें बाहर के अस्पतालों में भेज दिया गया। कई मरीजों ने यह भी दावा किया कि इम्पलांट उपलब्ध न होने के कारण उन्हें अपनी जेब से खर्च कर इलाज कराना पड़ रहा है।

इस मामले पर अस्पताल प्रशासन का कहना है कि फिलहाल इम्पलांट की सप्लाई नहीं है, जिसके कारण सर्जरी रुकी हुई है। कार्यवाहक सीएमएस डॉ. अजय राणा के अनुसार जैसे ही शासन से इम्पलांट उपलब्ध होंगे, सर्जरी दोबारा शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान योजना के तहत कुछ मरीजों को सुविधा दी जा रही है।

फिलहाल स्थिति यह है कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों के बीच मरीजों को राहत के बजाय परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

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