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UP RERA Rule Change: अब अपंजीकृत परियोजनाओं के खरीदारों की शिकायतें भी सुनी जाएंगी

UP RERA Rule Change: अब अपंजीकृत परियोजनाओं के खरीदारों की शिकायतें भी सुनी जाएंगी

नोएडा सहित पूरे उत्तर प्रदेश के रियल एस्टेट सेक्टर में बड़ा बदलाव हुआ है। Uttar Pradesh Real Estate Regulatory Authority ने अपने सामान्य विनियम 2019 में 10वां संशोधन लागू करते हुए अब अपंजीकृत परियोजनाओं में फ्लैट या दुकान खरीदने वाले आवंटियों की शिकायतें सुनने का फैसला लिया है। यह नया नियम 25 मार्च से प्रभावी हो गया है, जिससे हजारों खरीदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

अब तक जिन परियोजनाओं का पंजीकरण रेरा में नहीं था, उनके खरीदारों को शिकायत दर्ज कराने और न्याय पाने के लिए भटकना पड़ता था। लेकिन नए संशोधन के बाद ऐसे मामलों में भी सीधे रेरा की पीठ में सुनवाई संभव होगी। इससे उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जो अपंजीकृत परियोजनाओं में निवेश करने के बाद समस्याओं का सामना कर रहे थे।

रेरा अधिकारियों के अनुसार, अपंजीकृत परियोजनाओं या उनके डेवलपर्स की जानकारी प्राधिकरण के पास पहले से उपलब्ध नहीं होती है। इसलिए अब शिकायतकर्ताओं से विस्तृत जानकारी ली जाएगी, ताकि नोटिस जारी करने और मामले के निस्तारण में आसानी हो सके। इसके लिए जल्द ही एक अलग आदेश जारी किया जाएगा और रेरा पोर्टल पर नई सुविधा विकसित की जाएगी, जिसके जरिए प्रभावित आवंटी फॉर्म-एम के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कर सकेंगे।

नई व्यवस्था के तहत रेरा की पीठ सबसे पहले यह तय करेगी कि संबंधित परियोजना का पंजीकरण आवश्यक है या नहीं। यदि यह पाया जाता है कि परियोजना को रेरा में पंजीकरण कराना जरूरी था, तो प्राधिकरण अधिनियम और नियमों के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करेगा और संबंधित सचिव को रिपोर्ट भेजी जाएगी।

इस संशोधन से लंबे समय से बना संशय भी खत्म हो गया है कि अपंजीकृत परियोजनाओं के खरीदार रेरा से राहत मांग सकते हैं या नहीं। अब स्पष्ट हो गया है कि ऐसे खरीदार भी रेरा के पास जाकर न्याय की मांग कर सकते हैं और उन्हें सुनवाई का अधिकार मिलेगा।

इसके साथ ही एक और महत्वपूर्ण संशोधन प्रशासनिक और प्रोसेसिंग शुल्क से जुड़ा हुआ है। प्राधिकरण ने यह स्पष्ट किया है कि फ्लैट या दुकान के आवंटी की मृत्यु की स्थिति में यदि संपत्ति का हस्तांतरण परिवार के सदस्य को किया जाता है, तो बिल्डर अधिकतम 1000 रुपये तक ही प्रोसेसिंग शुल्क ले सकेगा। वहीं यदि हस्तांतरण किसी बाहरी व्यक्ति के नाम किया जाता है, तो अधिकतम 25 हजार रुपये तक का शुल्क निर्धारित किया गया है।

इस नियम में यह भी साफ किया गया है कि ऐसे मामलों में नया विक्रय या लीज एग्रीमेंट नहीं बनाया जाएगा, जिससे अनावश्यक कानूनी जटिलताओं से बचा जा सके। रेरा के अध्यक्ष Sanjay Bhoosreddy ने कहा कि इन संशोधनों का उद्देश्य रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाना और खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

उन्होंने यह भी कहा कि नए प्रावधानों के लागू होने से शिकायत निवारण प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, प्रभावी और उपभोक्ता अनुकूल बनेगी, जिससे रियल एस्टेट सेक्टर में विश्वास मजबूत होगा।

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