
INSV Kaundinya: भारत की प्राचीन समुद्री परंपरा का प्रतीक, आईएनएसवी कौंडिन्य ने पूरी की ऐतिहासिक विदेशी यात्रा
नई दिल्ली/मुंबई। भारतीय नौसेना के पारंपरिक स्टिच्ड सेलिंग वेसल आईएनएसवी कौंडिन्य ने अपनी पहली विदेशी समुद्री यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर ओमान के मस्कट से मुंबई लौटकर इतिहास रच दिया है। रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में इस पोत का फ्लैग-इन किया और उसकी उपलब्धि पर गौरव व्यक्त किया।
संजय सेठ ने कहा कि आईएनएसवी कौंडिन्य भारत की प्राचीन समुद्री ज्ञान परंपरा का पुनरुत्थान करने वाला प्रतीक है। यह युवाओं को सभ्यतागत आत्मविश्वास, साहस और नवाचार अपनाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने अभियान में क्रू के साहस, धैर्य और अन्वेषण की भावना की भी सराहना की। पश्चिमी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ कृष्णा स्वामीनाथन ने बताया कि इसके निर्माण, शोध, डिजाइन, पारंपरिक प्रशिक्षण और अभियान निष्पादन में हर चरण में कठोर परिश्रम लगा।
मुंबई पोर्ट में औपचारिक प्रवेश के दौरान रंग-बिरंगी पाल परेड और पारंपरिक वाटर आर्क सलामी ने समारोह को और गौरवपूर्ण बनाया। कार्यक्रम में ओमान के वाणिज्य दूतावास के प्रतिनिधि, वरिष्ठ अधिकारी, दिग्गज, समुद्री समुदाय और इतिहासकार भी उपस्थित रहे।
आईएनएसवी कौंडिन्य को मई 2025 में नौसेना में शामिल किया गया था। यह 20 मीटर लंबा पारंपरिक स्टिच्ड लकड़ी का पोत भारत की प्राचीन समुद्री विरासत और हिंद महासागर क्षेत्र में ऐतिहासिक संपर्कों का जीवंत प्रतीक है। इसका डिजाइन अजंता की गुफाओं में चित्रित 5वीं सदी की नावों से प्रेरित है। लकड़ी की तख्तियों को नारियल की रस्सी (कोयर) और प्राकृतिक रेजिन से सिलकर बनाया गया और इस पोत ने बिना आधुनिक संरचनात्मक सुदृढ़ीकरण के ही अरब सागर पार किया।
इस ऐतिहासिक अभियान से भारत की समुद्री परंपरा, पारंपरिक नौकानिर्माण और साहसिक समुद्री ज्ञान को वैश्विक मंच पर नई पहचान मिली है।
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