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उत्तर प्रदेश : ब्रज में छाई फगुआ की खुमारी: सखी बन नंदगांव पहुंचे बरसाना के हुरियारे

Mathura News : ब्रज की होली का रंग अब गहराने लगा है। परंपराओं की अनूठी कड़ी में गुरुवार को लाड़ली जी की नगरी बरसाना के हुरियारे ‘सखी’ का स्वरूप धारण कर कान्हा के गांव नंदगांव पहुंचे। मौका था सदियों पुरानी उस परंपरा का, जिसे ‘फगुआ’ मांगना कहा जाता है। जैसे ही बरसाना के इन मेहमानों ने नंदगांव की सीमा में प्रवेश किया, पूरा माहौल ‘राधे-राधे’ और ‘श्यामा-श्याम’ के जयकारों से गुंजायमान हो उठा।

नंदगांव में उस समय अद्भुत दृश्य देखने को मिला जब बरसाना से आए हुरियारे राधा रानी की सखियों के भाव में सराबोर दिखाई दिए। ब्रज की प्राचीन परंपरा के अनुसार ये हुरियारे नंदभवन में फगुआ लेने पहुंचते हैं। नंदगांव की हुरियारिनों ने भी कृष्ण स्वरूप धारण कर इन सखियों का स्वागत किया। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह प्रेमपूर्ण छेड़छाड़ द्वापर युग की स्मृतियों को जीवंत कर देती है और राधा-कृष्ण की लीलाओं का सजीव मंचन प्रतीत होती है।

ऐतिहासिक नंद चौक और रंगीली चौक पर समाज गायन शुरू होते ही पूरा वातावरण भक्तिरस में डूब गया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर रशिया की तान छिड़ी तो चारों ओर अबीर-गुलाल उड़ने लगा। हुरियारों और हुरियारिनों के बीच लठमार होली की प्रतीकात्मक छेड़छाड़ ने श्रद्धालुओं और पर्यटकों का मन मोह लिया। हंसी-ठिठोली और प्रेम के इस अनूठे संगम ने देशी-विदेशी आगंतुकों को भी झूमने पर मजबूर कर दिया।

ब्रज की यह होली केवल रंगों का उत्सव नहीं बल्कि प्रेम, समर्पण और सांस्कृतिक विरासत की जीवंत मिसाल है। स्थानीय जानकारों के अनुसार फगुआ मांगने की यह परंपरा सदियों से चली आ रही है और ब्रज की पहचान बन चुकी है। यहां न कोई छोटा है न बड़ा, सभी राधा-कृष्ण के प्रेम रंग में रंगे नजर आते हैं। देर शाम तक चले इस उत्सव के बाद बरसाना के हुरियारे उपहार लेकर विदा हुए और इसी के साथ ब्रज की होली के अगले पड़ाव की तैयारियां तेज हो गईं।

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संवाददाता

SHAHRUKH KHAN

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