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AI Health Collaboration: एम्स दिल्ली में इंडो-फ्रेंच सेंटर का उद्घाटन, आईएलबीएस ने भी सम्मेलन में रखी भागीदारी

AI Health Collaboration: एम्स दिल्ली में इंडो-फ्रेंच सेंटर का उद्घाटन, आईएलबीएस ने भी सम्मेलन में रखी भागीदारी

नई दिल्ली। एम्स दिल्ली में आयोजित हाई-लेवल एकेडमिक एंड साइंटिफिक मीटिंग्स (रश) के तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर केंद्रित एक महत्वपूर्ण सम्मेलन आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के प्रमुख चिकित्सक, शोधकर्ता, शिक्षाविद और नीति-निर्माता शामिल हुए। इस अवसर पर भारत-फ्रांस वैज्ञानिक सहयोग को नई दिशा देने की प्रतिबद्धता दोहराई गई।

सम्मेलन में इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलिअरी साइंसेज (आईएलबीएस) की भी सक्रिय भागीदारी रही। संस्थान के निदेशक प्रो. शिव कुमार सरिन ने भारत और फ्रांस के बीच पिछले 15 वर्षों में हेपेटोलॉजी और लिवर रोगों के क्षेत्र में हुए संयुक्त शोध कार्यों और उपलब्धियों को प्रस्तुत किया। उन्होंने एआई आधारित स्वास्थ्य नवाचार को भविष्य की चिकित्सा प्रणाली का अहम हिस्सा बताया।

भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष के अंतर्गत फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने एम्स परिसर में इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ का उद्घाटन किया। इस दौरान उनका स्वागत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा, एम्स के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। यह कार्यक्रम ‘रेंकोंत्रे यूनिवर्सितेयर ए साइंटिफिक डे ओ लेवल’ (रश) के तहत आयोजित हुआ, जिसमें दोनों देशों के 100 से अधिक संस्थानों ने भाग लिया।

राष्ट्रपति मैक्रों ने युवा भारतीय नवोन्मेषकों से संवाद करते हुए कहा कि एआई में सफलता तीन स्तंभों—कंप्यूटिंग क्षमता, प्रतिभा और पूंजी—पर आधारित है। उन्होंने स्वच्छ और कम-कार्बन ऊर्जा की उपलब्धता को डेटा सेंटर विस्तार के लिए अनिवार्य बताया। उन्होंने कहा कि सही नैतिक ढांचे के साथ अपनाया गया एआई नई बीमारियों की खोज, स्वास्थ्य सेवाओं की दक्षता और ऊर्जा प्रणालियों में बदलाव ला सकता है।

इंडो-फ्रेंच सेंटर फॉर एआई इन हेल्थ, एम्स नई दिल्ली, आईआईटी दिल्ली, पेरिस ब्रेन इंस्टिट्यूट और सॉरबोन यूनिवर्सिटी की संयुक्त पहल है। यह केंद्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता, न्यूरोसाइंस और क्लिनिकल मेडिसिन के संगम पर अंतःविषय शोध को बढ़ावा देगा। साथ ही शोधकर्ताओं की आवाजाही, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों और ट्रांसलेशनल रिसर्च को सशक्त किया जाएगा।

शिक्षा सहयोग पर बोलते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि फ्रांस भारतीय छात्रों और शोधकर्ताओं के लिए वीजा प्रक्रिया को सरल बनाएगा। उन्होंने बताया कि फ्रांस किफायती लागत पर उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा उपलब्ध कराता है और कई पाठ्यक्रम अंग्रेजी में भी संचालित होते हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय छात्रों को सुविधा मिलती है।

सम्मेलन के दौरान मस्तिष्क स्वास्थ्य, न्यूरोडीजेनेरेटिव रोगों और वैश्विक मानसिक स्वास्थ्य जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। यह आयोजन 19 फरवरी तक जारी रहेगा, जिसमें एआई आधारित स्वास्थ्य समाधान और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शोध सहयोग को मजबूत करने पर मंथन किया जाएगा।

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