AIIMS Delhi: आग, तेजाब, बिजली से विकृत चेहरों को नई पहचान देगा एम्स

AIIMS Delhi: आग, तेजाब, बिजली से विकृत चेहरों को नई पहचान देगा एम्स

नई दिल्ली, आग, तेजाब और बिजली से झुलसे चेहरों पर नई उम्मीद जगाते हुए All India Institute of Medical Sciences, New Delhi (एम्स दिल्ली) जल्द ही फेस ट्रांसप्लांट यानी चेहरा प्रत्यारोपण तकनीक शुरू करने जा रहा है। यह पहल उन मरीजों के लिए जीवन बदलने वाली साबित हो सकती है, जिन्होंने किसी दुर्घटना या हमले में अपनी पहचान खो दी है।

हार्वर्ड विशेषज्ञों से मिला प्रशिक्षण

इस अत्याधुनिक प्रक्रिया के लिए एम्स के 50 से अधिक विशेषज्ञों ने Harvard Medical School के विशेषज्ञ डॉ. इंद्रनील सिन्हा के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के 21 रेजिडेंट डॉक्टरों और पांच फैकल्टी सदस्यों—डॉ. मनीष सिंघल, डॉ. शशांक चौहान, डॉ. राजा तिवारी, डॉ. राजकुमार मानस और डॉ. शिवांगी साहा—ने इस प्रशिक्षण में भाग लिया। इसके अलावा ईएनटी, मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, नेफ्रोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, पैथोलॉजी, साइकियाट्री और क्रिटिकल केयर सहित कई विभागों के विशेषज्ञ भी शामिल रहे।

अब एक्सपेरिमेंटल नहीं, समय की जरूरत

प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख डॉ. मनीष सिंघल के अनुसार, फेस ट्रांसप्लांटेशन एक जटिल और उन्नत रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी है, जिसे दुनिया में अब तक लगभग 80 मरीजों पर ही किया गया है। उन्होंने कहा कि यह तकनीक अब प्रयोगात्मक नहीं रही, बल्कि गंभीर रूप से विकृत मरीजों के लिए समय की आवश्यकता बन चुकी है।

भारत में तेजाब हमले, विद्युत करंट, आग और रासायनिक दुर्घटनाओं के कारण हर वर्ष बड़ी संख्या में लोग चेहरे की गंभीर विकृति का शिकार होते हैं। कई मरीज 10–12 सर्जरी के बाद भी सामान्य जीवन नहीं जी पाते। ऐसे मामलों में सही कैंडिडेट की पहचान और काउंसलिंग बेहद जरूरी होती है।

दान में मिली त्वचा से होगा प्रत्यारोपण

फेस ट्रांसप्लांट की प्रक्रिया दान में प्राप्त त्वचा और ऊतकों की मदद से की जाएगी। त्वचा का चयन रंग, उम्र और लिंग के अनुसार मिलान करने के बाद किया जाता है। सर्जरी 4–5 घंटे में पूरी हो सकती है, जबकि डोनर से नसें, रक्त वाहिकाएं, मांसपेशियां और अन्य ऊतक निकालने में 8–10 घंटे लग सकते हैं।

रोगी रजिस्ट्री बनेगी

एम्स फेस ट्रांसप्लांट के इच्छुक मरीजों के लिए विशेष रोगी रजिस्ट्री तैयार करेगा। इसमें मरीज की स्वास्थ्य स्थिति, चेहरे की विकृति और अन्य आवश्यक जानकारियां दर्ज की जाएंगी, जिससे अनुसंधान और उपचार की गुणवत्ता बेहतर हो सके।

सर्जरी के बाद मानसिक परामर्श जरूरी

मनोचिकित्सा विभाग की विशेषज्ञों के अनुसार, सर्जरी के बाद पहचान से जुड़ा मानसिक संकट उभर सकता है, क्योंकि नया चेहरा पूरी तरह पहले जैसा नहीं होता। सर्जरी से पहले और बाद में तीन चरणों में काउंसलिंग की जाएगी। कुछ मरीजों में पोस्ट ट्रॉमेटिक स्ट्रेस, एंजायटी या डेलिरियम जैसी समस्याएं भी देखी जा सकती हैं।

कौन नहीं हैं उपयुक्त कैंडिडेट?

जिन मरीजों में पर्याप्त मोटिवेशन नहीं है, जो मानसिक रूप से अस्थिर हैं, जिनमें सक्रिय संक्रमण या कैंसर है—वे इस प्रक्रिया के लिए उपयुक्त नहीं माने जाते।

एम्स दिल्ली की यह पहल न केवल चिकित्सा क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी, बल्कि उन लोगों के जीवन में नई पहचान और आत्मविश्वास भी लौटाएगी, जो अब तक सामाजिक और मानसिक संघर्ष से जूझ रहे थे।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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