Mahua Moitra Viral Chat Case: महुआ मोइत्रा के वायरल चैट्स पर हाईवोल्टेज ड्रामा: नोएडा में आमने-सामने आई बंगाल और यूपी पुलिस, वारंट पर कार्रवाई को लेकर टकराव

Mahua Moitra Viral Chat Case: महुआ मोइत्रा के वायरल चैट्स पर हाईवोल्टेज ड्रामा: नोएडा में आमने-सामने आई बंगाल और यूपी पुलिस, वारंट पर कार्रवाई को लेकर टकराव
नोएडा। तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा और चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की कथित वायरल चैट्स से जुड़े मामले ने सोमवार को उस समय हाईवोल्टेज ड्रामा का रूप ले लिया, जब सेक्टर-110 स्थित लोटस पनास सोसायटी में पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश पुलिस आमने-सामने आ गईं। आरोपी सुरजीत दास गुप्ता की गिरफ्तारी को लेकर दोनों राज्यों की पुलिस के दावों और आरोपों ने पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक रंग दे दिया है।
जानकारी के अनुसार, सुरजीत दास गुप्ता पर महुआ मोइत्रा और प्रशांत किशोर की कथित निजी चैट्स को सार्वजनिक करने का आरोप है। इसी मामले में कोर्ट से जारी वारंट के आधार पर नोएडा पुलिस पहले उसके फ्लैट पर पहुंची थी। सूत्रों के मुताबिक, जब पुलिस टीम लोटस पनास सोसायटी के फ्लैट पर कार्रवाई के लिए पहुंची तो घटनाक्रम अचानक बदल गया। आरोप है कि सुरजीत दास ने एक पुलिसकर्मी के मोबाइल फोन पर किसी व्यक्ति से बात करवाई, जिसे उसने एक नेता बताया। कथित तौर पर उस व्यक्ति ने पुलिस टीम से कार्रवाई रोकने और आगे के निर्देशों का इंतजार करने को कहा। इसके बाद पुलिस टीम वहां से लौट आई। बाद में आधिकारिक दस्तावेजों में उल्लेख किया गया कि आरोपी फ्लैट पर मौजूद नहीं मिला।
इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो खुद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर साझा किया, जिससे मामला और तूल पकड़ गया। वीडियो के वायरल होते ही राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई और पुलिस की भूमिका पर सवाल उठने लगे।
मामला उस समय और गंभीर हो गया जब पश्चिम बंगाल के कृष्णनगर से एक विशेष पुलिस टीम सोमवार सुबह नोएडा पहुंची। बंगाल पुलिस का कहना है कि उनके पास सुरजीत दास के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (नॉन-बेलेबल वारंट) था और वे उसे गिरफ्तार करने के उद्देश्य से आए थे। बंगाल पुलिस के अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने आरोपी को ट्रेस कर लिया था और हिरासत में लेने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी थी, लेकिन तभी नोएडा पुलिस के 10-15 जवान मौके पर पहुंच गए और गिरफ्तारी की कार्रवाई रोक दी।
बंगाल पुलिस ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस ने उन्हें अपेक्षित सहयोग नहीं दिया, जिसके कारण उन्हें बिना गिरफ्तारी के लौटना पड़ा। दूसरी ओर, नोएडा सेंट्रल पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, पश्चिम बंगाल पुलिस ने थाना फेस-2 को विधिवत गैर-जमानती वारंट सौंपा था। आरोपी की लोकेशन सेक्टर-110 स्थित लोटस पनास सोसायटी में बताई गई थी, जिसके बाद स्थानीय चौकी प्रभारी सहित पुलिस टीम बंगाल पुलिस के साथ संयुक्त रूप से मौके पर पहुंची।
नोएडा पुलिस का कहना है कि फ्लैट और संबंधित टावर की पूरी जानकारी जुटाई गई, दबिश दी गई, लेकिन आरोपी वहां मौजूद नहीं मिला। पुलिस के अनुसार, आरोपी की पत्नी को कानूनी प्रक्रिया के तहत आवश्यक सूचना दे दी गई। इस दौरान सोसायटी परिसर में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हो गए थे, जिससे स्थिति संवेदनशील हो गई। एहतियातन अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने स्पष्ट बयान जारी करते हुए कहा कि स्थानीय पुलिस ने बंगाल पुलिस को पूरा सहयोग दिया है और असहयोग के आरोप निराधार हैं। उन्होंने कहा कि कार्रवाई पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई और किसी भी स्तर पर बाधा नहीं डाली गई।
इस पूरे प्रकरण ने दो राज्यों की पुलिस के बीच समन्वय, अधिकार क्षेत्र और राजनीतिक संवेदनशील मामलों में कार्रवाई की पारदर्शिता को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो और परस्पर विरोधी बयानों के चलते मामला अब केवल कानूनी दायरे तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि राजनीतिक बहस का विषय बन चुका है।
फिलहाल, सुरजीत दास गुप्ता की गिरफ्तारी को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। यह देखना अहम होगा कि आगे की कानूनी प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है और दोनों राज्यों की पुलिस के दावों की जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं। मामला अब राजनीतिक और कानूनी दोनों मोर्चों पर सुर्खियों में है।





