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Arthritis Prevention: सक्रिय जीवनशैली से गठिया पर पाया जा सकता है नियंत्रण, स्वस्थ आदतें हैं सबसे बड़ा बचाव: डॉ. उमा कुमार

Arthritis Prevention: सक्रिय जीवनशैली से गठिया पर पाया जा सकता है नियंत्रण, स्वस्थ आदतें हैं सबसे बड़ा बचाव: डॉ. उमा कुमार

नई दिल्ली, नियमित योग, व्यायाम और संतुलित जीवनशैली अपनाकर गठिया जैसे ऑटो इम्यून रोग से बचाव संभव है। एम्स दिल्ली के रूमेटोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. उमा कुमार ने कहा कि यदि व्यक्ति सक्रिय रहता है, कैल्शियम युक्त पौष्टिक आहार लेता है, रोजाना पर्याप्त पानी पीता है और 6 से 8 घंटे की नींद लेता है, तो गठिया के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि गठिया कोई एक बीमारी नहीं, बल्कि 60 से अधिक रोग स्थितियों का समूह है, जो शरीर के जोड़ों को प्रभावित करता है।

डॉ. उमा कुमार ने बताया कि हर जोड़ों का दर्द गठिया नहीं होता। जब शरीर में कार्टिलेज और सिनोवियल फ्लूइड का संतुलन बिगड़ता है, खासकर उम्र बढ़ने या लंबे समय तक निष्क्रिय रहने के कारण, तब जोड़ों में अकड़न और दर्द की समस्या शुरू होती है। ऑटो इम्यून डिजीज से पुरुष और महिलाएं दोनों प्रभावित होते हैं, लेकिन प्रजनन के बाद की उम्र की महिलाओं में इसका खतरा अधिक पाया जाता है।

उन्होंने दिल्ली के पर्यावरण पर आईसीएमआर की एक स्टडी का हवाला देते हुए बताया कि राजधानी में 10 साल से अधिक समय से रह रहे 30 से 50 वर्ष की आयु के स्वस्थ लोगों पर किए गए अध्ययन में 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से पीड़ित पाए गए। इनमें कई लोगों के शरीर में विभिन्न बीमारियों से जुड़ी ऑटो एंटीबॉडी भी पाई गईं, जिससे भविष्य में उन्हें ये रोग होने की आशंका बढ़ जाती है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि मुख्य सड़कों पर रहने वाले लोगों में गठिया और अन्य ऑटो इम्यून रोगों का खतरा ज्यादा जबकि मुख्य सड़क से 250 मीटर दूर रहने वालों में अपेक्षाकृत कम पाया गया।

डॉ. कुमार ने बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आजकल माता-पिता बच्चों को जरूरत से ज्यादा सुरक्षित माहौल में रखते हैं, जैसे केवल आरओ का पानी देना, मिट्टी में खेलने से रोकना और बाहरी खानपान से दूर रखना। इससे बच्चों की इम्युनिटी कमजोर हो जाती है। बच्चों को खुले वातावरण में खेलने दें, अलग-अलग तरह का भोजन करने दें और सामान्य संक्रमणों से लड़ने का मौका दें, जिससे उनका शरीर मजबूत बनेगा और भविष्य में गठिया जैसे रोगों से बचाव हो सकेगा।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसी व्यक्ति को बिना कारण बुखार रहना, लगातार थकान, मुंह में छाले, आंखों में सूखापन, त्वचा पर चकत्ते, जोड़ों में दर्द, धूप में निकलने पर चेहरे पर रैशेज, मुंह में लार कम बनना जैसे लक्षण दिखाई दें तो सतर्क हो जाना चाहिए। इसके अलावा फेफड़ों या आंतों की समस्या, अचानक बीपी बढ़ना, सुनाई देना कम होना या नब्ज महसूस न होना भी ऑटो इम्यून रोग के संकेत हो सकते हैं।

गठिया के कारणों पर बात करते हुए डॉ. उमा कुमार ने बताया कि लगभग 40 प्रतिशत कारण आनुवंशिक और 60 प्रतिशत पर्यावरणीय होते हैं। भोजन के जरिए शरीर में पहुंचने वाले पेस्टीसाइड और केमिकल, वायु प्रदूषण से मिलने वाले पीएम 2.5 और पीएम 10, मोटापा, धूम्रपान, खराब जीवनशैली और हार्मोनल बदलाव इसके प्रमुख कारण हैं। कुछ मामलों में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी भी गठिया को जन्म देती है।

गठिया के सामान्य लक्षणों में जोड़ों में दर्द, सूजन, सुबह के समय अकड़न, लालिमा, गर्माहट और थकान शामिल हैं, जिससे मरीज को चलने-फिरने में परेशानी होती है। बचाव के लिए उन्होंने धूप से विटामिन डी लेने, सप्ताह में कम से कम 150 मिनट योग या व्यायाम करने और नियमित शारीरिक गतिविधि को जरूरी बताया। योग से न केवल जोड़ों की लचीलापन बढ़ता है, बल्कि नींद और हार्मोनल संतुलन में भी सुधार देखा गया है।

डॉ. उमा कुमार ने कहा कि गठिया की पहचान किसी एक टेस्ट से नहीं होती। यह ऐसा ऑटो इम्यून रोग है, जिसकी जांच लक्षणों, मेडिकल हिस्ट्री और विभिन्न जांचों के आधार पर की जाती है। यदि जोड़ों में लगातार दर्द, सूजन या अकड़न बनी रहे, तो देर किए बिना रूमेटोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए, ताकि समय रहते इलाज शुरू हो सके।

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