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Income Tax Return 2025 26: आयकर रिटर्न 2025-26: आयकर विभाग के मैसेज पर घबराने की जरूरत नहीं, जानिए पूरा स्पष्टीकरण

Income Tax Return 2025 26: आयकर रिटर्न 2025-26: आयकर विभाग के मैसेज पर घबराने की जरूरत नहीं, जानिए पूरा स्पष्टीकरण

आयकर रिटर्न दाखिल करने वाले लाखों करदाताओं के लिए आयकर विभाग ने एक अहम स्पष्टीकरण जारी किया है। आयकर विभाग (आईटीडी) ने स्पष्ट किया है कि हाल के दिनों में कुछ करदाताओं को उनके लेन-देन को लेकर जो संदेश भेजे गए हैं, वे किसी तरह की जांच या प्रवर्तन कार्रवाई की शुरुआत नहीं हैं, बल्कि केवल सलाहात्मक सूचना हैं। इनका उद्देश्य करदाताओं को स्वैच्छिक रूप से नियमों का पालन करने के लिए प्रेरित करना है।

आयकर विभाग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि ये संदेश केवल उन्हीं मामलों में भेजे गए हैं, जहां आयकर रिटर्न में दी गई जानकारी और रिपोर्टिंग संस्थाओं से विभाग को मिली जानकारी के बीच स्पष्ट और महत्वपूर्ण अंतर पाया गया है। विभाग का कहना है कि यह संदेश करदाताओं की सुविधा के लिए हैं, ताकि उन्हें यह बताया जा सके कि उनके लेन-देन से जुड़ी कौन-सी जानकारी आयकर विभाग के पास उपलब्ध है।

विभाग ने यह भी साफ किया कि यह अभियान केवल चुनिंदा मामलों तक सीमित है, जहां प्रथम दृष्टया विसंगतियां नजर आई हैं। इसका उद्देश्य करदाताओं को अपने वार्षिक सूचना विवरण यानी AIS की समीक्षा करने और अनुपालन पोर्टल के माध्यम से जवाब देने का अवसर देना है। यदि करदाता को लगता है कि रिटर्न में कोई गलती रह गई है, तो वे संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकते हैं या यदि अब तक रिटर्न दाखिल नहीं किया है तो विलंबित रिटर्न भर सकते हैं।

आयकर विभाग ने करदाताओं को याद दिलाया है कि आकलन वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित या विलंबित आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर 2025 है। विभाग ने कहा है कि यदि किसी करदाता को विसंगति नजर आती है तो वह अनुपालन पोर्टल के माध्यम से तुरंत जवाब दें, और यदि दी गई जानकारी सही है तो ऐसे संदेश को नजरअंदाज भी किया जा सकता है।

इस बीच, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के अध्यक्ष रवि अग्रवाल ने पहले बताया था कि कुछ मामलों में आयकर रिफंड में देरी इसलिए हुई है क्योंकि उच्च मूल्य या संदिग्ध रिफंड दावों की जांच की जा रही थी। उन्होंने कहा था कि गलत कटौतियों और फर्जी दावों के मामलों के सामने आने के बाद यह समीक्षा की गई है, जबकि कम राशि वाले वैध रिफंड लगातार जारी किए जा रहे हैं।

आयकर विभाग ने यह भी बताया कि विदेशी संपत्तियों और आय से जुड़े मामलों में अनुपालन बढ़ाने के लिए एक विशेष “नज अभियान” चलाया जा रहा है। यह अभियान स्वचालित सूचना विनिमय व्यवस्था के तहत विदेशी देशों से प्राप्त जानकारियों के आधार पर शुरू किया गया है। पहले चरण में लगभग 25 हजार उच्च जोखिम वाले मामलों की पहचान की गई है, जहां विदेशी संपत्ति होने के संकेत मिले हैं लेकिन आयकर रिटर्न में उसका खुलासा नहीं किया गया है।

इन करदाताओं को एसएमएस और ईमेल के जरिए सूचित किया जा रहा है और उनसे 31 दिसंबर 2025 तक अपना AIS जांचकर रिटर्न में सुधार करने को कहा गया है, ताकि भविष्य में किसी दंडात्मक कार्रवाई से बचा जा सके। आयकर अधिनियम 1961 और काला धन अधिनियम 2015 के तहत विदेशी संपत्तियों और आय का सही खुलासा अनिवार्य है और इसमें लापरवाही पर सख्त जुर्माने का प्रावधान है।

आयकर विभाग ने भरोसा दिलाया है कि वैध रिफंड दिसंबर तक जारी कर दिए जाएंगे, जबकि संदिग्ध और गलत दावों की जांच प्रक्रिया जारी रहेगी। विभाग का कहना है कि करदाताओं को डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि समय रहते अपनी जानकारी की जांच कर स्वैच्छिक अनुपालन करना ही सबसे बेहतर विकल्प है।

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