Noida: धनौरी वेटलैंड के पास जैव विविधता पार्क विकसित करने की प्रक्रिया तेज, परामर्शदाता कंपनी चयन की तैयारी

Noida: धनौरी वेटलैंड के पास जैव विविधता पार्क विकसित करने की प्रक्रिया तेज, परामर्शदाता कंपनी चयन की तैयारी
नोएडा के यमुना सिटी सेक्टर-17 में स्थित धनौरी वेटलैंड के पास जैव विविधता पार्क विकसित करने की दिशा में प्राधिकरण ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की व्यवहार्यता जांच और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने के लिए परामर्शदाता कंपनी के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण की ओर से रिक्वेस्ट फॉर प्रपोजल जारी की गई है, जिसके तहत इच्छुक कंपनियां बुधवार से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी। आवेदन करने की अंतिम तिथि 29 दिसंबर तय की गई है।
प्राधिकरण के अधिकारियों के अनुसार धनौरी वेटलैंड का कुल क्षेत्रफल लगभग 45 हेक्टेयर है, जो दलदली क्षेत्र के रूप में मौजूद है। इस मूल जलाशय और दलदली हिस्से को बिना किसी छेड़छाड़ के पूरी तरह संरक्षित रखा जाएगा। इसके अलावा करीब 25 एकड़ जमीन पहले से प्राधिकरण के कब्जे में है, जबकि 12 हेक्टेयर ग्राम सभा की जमीन को भी जल्द अधिग्रहित किया जाएगा। इसके साथ ही लगभग 30 हेक्टेयर अतिरिक्त भूमि खरीदकर यहां बड़े स्तर पर जैव विविधता पार्क विकसित करने की योजना है।
अधिकारियों ने बताया कि यह पूरी परियोजना सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के अनुरूप तैयार की जाएगी। पार्क के विकास में जमीन के उपयोग में बदलाव नहीं किया जाएगा और न ही प्राकृतिक जल प्रवाह के साथ कोई छेड़छाड़ होगी। पर्यावरण की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों के आसपास किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या भारी निर्माण कार्य पर रोक रहेगी। प्राधिकरण ने यह भी स्पष्ट किया है कि धनौरी वेटलैंड के लिए रामसर टैग लेने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जाएगी। इसका कारण यह है कि यह क्षेत्र प्रस्तावित एयरपोर्ट और घनी रिहायशी आबादी के नजदीक स्थित है। रामसर साइट बनने की स्थिति में यहां बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षियों का आगमन होगा, जिससे विमानन सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
प्राधिकरण के अनुसार धनौरी वेटलैंड का 45.6 हेक्टेयर का मूल जलाशय पूरी तरह अपने प्राकृतिक स्वरूप में बना रहेगा। जलाशय के किनारों पर केवल सीमित और पर्यावरण के अनुकूल गतिविधियों पर विचार किया जाएगा, ताकि संरक्षण और रखरखाव के लिए आवश्यक संसाधन जुटाए जा सकें। चयनित परामर्शदाता कंपनी को पर्यावरण, वन क्षेत्र और पारिस्थितिकी संरक्षण से जुड़ी परियोजनाओं का अनुभव होना अनिवार्य होगा। कंपनी द्वारा तैयार की जाने वाली डीपीआर में पारिस्थितिक सुधार, जल प्रबंधन, आगंतुकों के प्रबंधन और लंबे समय तक संरक्षण व देखरेख की विस्तृत योजना शामिल की जाएगी।
गौरतलब है कि जून 2019 में केंद्र सरकार ने उत्तर प्रदेश सरकार से धनौरी वेटलैंड को रामसर साइट के रूप में प्रस्तावित करने को कहा था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से औपचारिक नामांकन नहीं भेजा गया। जबकि यह क्षेत्र कम से कम दो रामसर मानकों को पूरा करता है और यहां हर वर्ष 20 हजार से अधिक जलीय पक्षी और सारस पक्षी निवास करते हैं। सीमा, जमीन और भविष्य की विकास योजनाओं को लेकर विभिन्न एजेंसियों के बीच सहमति न बन पाने के कारण यह मामला आगे नहीं बढ़ सका और बाद में यह नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल तक भी पहुंचा।
यीडा के एसीईओ शैलेंद्र भाटिया ने बताया कि प्रस्तावित जैव विविधता पार्क का मॉडल धनौरी वेटलैंड की पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखते हुए शहरी विकास और हवाई यात्रा से जुड़ी जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जाएगा। इसके लिए आरएफपी जारी कर दी गई है और इच्छुक कंपनियां 17 से 29 दिसंबर तक आवेदन कर सकती हैं।





