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UNESCO Diwali Heritage: यूनेस्को ने दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया, सिद्ध पीठ में दीपोत्सव की भव्य चमक

UNESCO Diwali Heritage: यूनेस्को ने दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किया, सिद्ध पीठ में दीपोत्सव की भव्य चमक

रिपोर्ट: रवि डालमिया

पूर्वी दिल्ली के चंदू पार्क स्थित सिद्ध पीठ श्री सीताराम संतसेवा मंदिर एवं गौशाला में सोमवार रात दीपों की रौशनी और भक्ति की अनूठी छटा नजर आई। अवसर था यूनेस्को द्वारा 10 दिसंबर 2025 को दीपावली को विश्व की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर घोषित किए जाने का। इस ऐतिहासिक घोषणा के बाद सिद्ध पीठ में भव्य दीपोत्सव का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने दीप जलाकर अपना हर्ष और गर्व व्यक्त किया।
सिद्ध पीठ के श्री महंत एवं महामंडलेश्वर श्री रामगोविन्द दास महात्यागी महाराज ने इसे संपूर्ण भारतीय समाज के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण बताया। उन्होंने कहा कि दीपावली केवल एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की जीवंत पहचान है—अंधकार पर प्रकाश की जीत, बुराई पर अच्छाई की विजय और नए आरंभ का पावन संदेश। उन्होंने कहा कि यह परंपरा परिवारों, समुदायों और समाज को जोड़ती है, इसलिए इसका वैश्विक मान्यता प्राप्त करना भारत की सांस्कृतिक आत्मा का सम्मान है।
यूनेस्को के निर्णय के बाद आयोजित इस दीपोत्सव में दिल्ली प्रदेश भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के सह संयोजक राजीव शर्मा, समाजसेवी महावीर गोयल, सुरेंद्र नागपाल, रमेश गर्ग और नरेश यादव सहित बड़ी संख्या में भक्त शामिल हुए। सभी ने प्रभु श्रीराम और राष्ट्र की समृद्धि के लिए दीप प्रज्वलित कर दीपावली के वैश्विक सम्मान की खुशी साझा की।
राजीव शर्मा ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि दीपावली को यूनेस्को की अमूर्त विरासत सूची में शामिल किया जाना भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में बसे करोड़ों भारतीयों के लिए गर्व का विषय है। उन्होंने यूनेस्को भारत कार्यालय के निदेशक टिम कर्टिस को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक धरोहर को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने याद दिलाया कि यह घोषणा दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित यूनेस्को की बैठक के दौरान हुई।
उन्होंने आगे कहा कि स्वतंत्रता के बाद यह पहली बार है जब किसी सरकार ने भारतीय संस्कृति के वैश्विक प्रसार और मान्यता के लिए इतनी गंभीर और प्रभावी पहल की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशेष आभार व्यक्त किया, जिनके प्रयासों से भारतीय परंपराओं और उत्सवों को विश्व मंच पर नई प्रतिष्ठा मिली है।
सिद्ध पीठ में आयोजित यह दीपोत्सव न केवल एक धार्मिक आयोजन था बल्कि भारतीय सांस्कृतिक गौरव, परंपरा और एकजुटता का भव्य उत्सव बन गया।

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