Uttar Pradesh : योगी सरकार का ‘संभव 6.0’ अभियान शुरू, गर्भावस्था से लेकर बाल्यावस्था तक कुपोषण से मिलेगी मुक्ति

Lucknow : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मार्गदर्शन में बाल विकास एवं पुष्टाहार विभाग ने मातृ एवं बाल कुपोषण को कम करने तथा पोषण सुरक्षा को मजबूत बनाने के उद्देश्य से ‘संभव 6.0’ अभियान की शुरुआत की है। अभियान का राज्य स्तरीय शुभारम्भ बीती 18 जून को लखनऊ से किया गया। इस वर्ष अभियान की थीम गर्भावस्था से बाल्यावस्था तक पोषण सुरक्षा निर्धारित की गई है, जिसके अंतर्गत गर्भवती महिलाओं, धात्री माताओं, नवजात शिशुओं और बच्चों को बेहतर पोषण एवं स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
‘संभव 6.0’ अभियान को प्रभावी बनाने के लिए आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग, पंचायती राज विभाग, यूनिसेफ तथा अन्य विकास सहयोगी संस्थाओं के सहयोग से व्यापक कार्ययोजना तैयार की गई है। अभियान के दौरान सभी विभाग संयुक्त रूप से निगरानी करेंगे। प्रगति का नियमित मूल्यांकन करने के लिए साप्ताहिक रिपोर्ट कार्ड तैयार किए जाएंगे, जबकि जुलाई से सितम्बर 2026 तक प्रत्येक 15 दिन पर राज्य स्तर से जिला कार्यक्रम अधिकारियों की समीक्षा बैठक आयोजित होगी।
व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम किए जाएंगे संचालित
सभी मंडलों और जनपदों के लिए माइक्रो प्लान साझा किया गया है। इसके तहत व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएंगे ताकि जमीनी स्तर पर कार्यरत कर्मियों को अभियान की रणनीति और लक्ष्यों से भलीभांति अवगत कराया जा सके। इसके साथ ही आईसीडीएस, स्वास्थ्य विभाग और पंचायती राज विभाग के संयुक्त सहयोग से प्रदेशभर में विशेष पोषण पाठशाला का आयोजन किया जाएगा, जहां परिवारों को संतुलित आहार, शिशु देखभाल और मातृ स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी दी जाएगी।
कुपोषण में कमी और स्वस्थ भविष्य है अभियान का लक्ष्य
‘संभव 6.0’ जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण पर आधारित अभियान है, जिसका उद्देश्य गर्भधारण से लेकर बाल्यावस्था तक पोषण संबंधी सेवाओं को सुदृढ़ करना है। जुलाई 2026 में जिला पोषण समिति (डीएनसी) की बैठकों के दौरान सभी जनपदों में अभियान का औपचारिक शुभारम्भ किया जाएगा। अभियान के परिणामों का प्रारम्भिक आकलन अक्टूबर 2026 के अंतिम सप्ताह में किया जाना प्रस्तावित है। अभियान के प्रभाव और उपलब्धियों का निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित करने के लिए नियोजन विभाग के माध्यम से तृतीय पक्ष मूल्यांकन कराया जाएगा। इससे वास्तविक प्रगति का आकलन संभव हो सकेगा और भविष्य की रणनीतियों को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकेगा। : हर्षिता माथुर, निदेशक, बाल विकास एवं पुष्टाहार तथा राज्य पोषण मिशन





