उत्तर प्रदेश : बरसाना की रंगीली गली में बरसीं ‘प्रेम की लाठियाँ’, नंदगाँव के हुरियारों पर चढ़ा राधा रानी की भक्ति का रंग

Mathura News : ब्रजमंडल में होली का उल्लास चरम पर पहुँच गया जब राधा रानी की नगरी बरसाना में विश्वविख्यात लठामार होली का भव्य आयोजन हुआ। फाल्गुन मास की शुक्ल पक्ष नवमी के पावन अवसर पर सदियों पुरानी द्वापरयुगीन परंपरा एक बार फिर जीवंत हो उठी। नंदगाँव के हुरियारों और बरसाना की हुरियारिनों के बीच भक्ति, प्रेम, हास्य और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
नंदगाँव से आई हुरियारों की टोली ने सुबह नंदभवन में ठाकुरजी के समक्ष पद गायन कर आशीर्वाद लिया और ‘चलौ बरसाने में खेलें होरी’ के जयघोष के साथ बरसाना के लिए प्रस्थान किया। पारंपरिक धोती, बगलबंदी और सिर पर सजी भारी पाग धारण किए हुरियारे हाथों में ढाल लेकर पैदल ही बरसाना पहुँचे।
बरसाना पहुँचने पर सबसे पहले समाज प्रिया कुंड यानी पीली पोखर पहुँची, जहाँ उनका पारंपरिक स्वागत-सत्कार किया गया। यहीं हुरियारों ने अपनी पाग बाँधी और लाठियों की मार से बचाव की तैयारी की। इसके बाद वे टोलियों के रूप में श्रीजी मंदिर की ओर बढ़े, जहाँ अबीर-गुलाल से आसमान सतरंगी हो उठा और पूरा धाम ‘राधे-राधे’ के जयकारों से गूंजने लगा।
जैसे ही हुरियारे बरसाना की प्रसिद्ध रंगीली गली में पहुँचे, सजी-धजी हुरियारिनों ने मोर्चा संभाल लिया। पहले हंसी-ठिठोली और रसिया गायन हुआ, जो देखते ही देखते प्रेमरस से भरी लठामार परंपरा में बदल गया। हुरियारिनों ने प्रेम से पगी लाठियाँ बरसाईं तो हुरियारों ने ढालों से बचाव किया। मान्यता है कि बरसाना की गोपियों की लाठी का स्पर्श भी सौभाग्य प्रदान करता है।
इस अलौकिक उत्सव को देखने के लिए देश ही नहीं बल्कि विदेशों से भी हजारों श्रद्धालु बरसाना पहुँचे। मंदिर की सीढ़ियों से लेकर घरों की छतों तक जनसैलाब उमड़ पड़ा। लड्डू होली के बाद आयोजित लठामार होली ने एक बार फिर ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और परंपरा की भव्यता को विश्व पटल पर गौरवान्वित कर दिया।

