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Cyber crime: फर्जी लोन अप्रूवल के नाम पर साइबर ठगी, आरोपी तुषार दूबे को अग्रिम जमानत से इनकार

Cyber crime: फर्जी लोन अप्रूवल के नाम पर साइबर ठगी, आरोपी तुषार दूबे को अग्रिम जमानत से इनकार

नोएडा। फर्जी लोन अप्रूवल के नाम पर लोगों से जीएसटी, प्रोसेसिंग फीस और अन्य शुल्क वसूल कर साइबर ठगी करने के मामले में नामजद आरोपी तुषार दूबे को सत्र न्यायालय से कोई राहत नहीं मिली है। अदालत ने आरोपी की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए माना कि प्रथम दृष्टया उसके खिलाफ गंभीर और संगठित अपराध से जुड़े तथ्य सामने आए हैं।
यह मामला थाना साइबर क्राइम से संबंधित है, जिसमें अभियोजन की ओर से पेश केस डायरी और साक्ष्यों का अवलोकन करने के बाद अदालत ने अग्रिम जमानत देने से साफ इनकार कर दिया।
अभियोजन के अनुसार आरोपी एक संगठित गिरोह के रूप में काम कर रहे थे। गिरोह ने एक निजी लोन कंपनी से लोन लेने के इच्छुक लोगों का डाटा हासिल किया और फिर उन्हें फर्जी लोन अप्रूवल लेटर भेजे। इन दस्तावेजों के जरिए पीड़ितों को भरोसे में लेकर जीएसटी, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज के नाम पर उनसे पैसे ट्रांसफर कराए गए।
16 दिसंबर 2025 को थाना साइबर क्राइम में दर्ज एफआईआर में हिमांशु चावड़ा, हिमांशु दूबे, मयंक उर्फ सुमित, गगन और तुषार दूबे को नामजद किया गया था। आरोप है कि ये लोग व्हाट्सएप कॉल और मैसेज के जरिए पीड़ितों से संपर्क करते थे और फर्जी दस्तावेज भेजकर उन्हें लोन मंजूरी का झांसा देते थे। इसके बाद अलग-अलग बैंक खातों में धनराशि ट्रांसफर कराई जाती थी।
विवेचना के दौरान एनसीआरपी पोर्टल पर दर्ज तमिलनाडु निवासी एक शिकायतकर्ता से 1 लाख 10 हजार 500 रुपये की ठगी का मामला सामने आया। जांच में पाया गया कि इस रकम में से 85 हजार 500 रुपये आरोपी तुषार दूबे के एयरटेल पेमेंट बैंक खाते में ट्रांसफर हुए थे। अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी ने जानबूझकर अपने बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया।
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद अदालत ने माना कि मामला गंभीर है और इस स्तर पर आरोपी को अग्रिम जमानत देना उचित नहीं होगा।

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