RSS Centenary: RSS शताब्दी 26 जगहों पर हिंदू सम्मेलन का आयोजन, वेद वन पार्क में 4000 से ज़्यादा लोग इकट्ठा हुए

RSS Centenary: RSS शताब्दी, 26 जगहों पर हिंदू सम्मेलन का आयोजन, वेद वन पार्क में 4000 से ज़्यादा लोग इकट्ठा हुए
नोएडा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में रविवार को शहर में व्यापक स्तर पर हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। ग्रेटर नोएडा और नोएडा के विभिन्न क्षेत्रों में कुल 26 स्थानों पर आयोजित इन सम्मेलनों में बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। सेक्टर-78 स्थित वेद वन पार्क में आयोजित मुख्य सम्मेलन में करीब 4000 से अधिक लोग शामिल हुए, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और धार्मिक-सांस्कृतिक माहौल देखने को मिला।
वेद वन पार्क में आयोजित सम्मेलन की अध्यक्षता उद्यमी एवं सामाजिक कार्यकर्ता सीमा कमल कुमार ने की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के संपादक रवि शंकर रहे। उन्होंने अपने संबोधन में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की 100 वर्षों की यात्रा, उसके सामाजिक योगदान और राष्ट्र निर्माण में निभाई गई भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि संघ ने समाज को संगठित करने और सांस्कृतिक मूल्यों को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सम्मेलन में डॉ. नरेश शर्मा ने गोरक्षा के महत्व और उससे जुड़े सामाजिक सरोकारों पर अपने विचार व्यक्त किए। वहीं आशीष गोडसे ने धर्मांतरण से समाज और संस्कृति पर पड़ने वाले प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। वक्ताओं ने समाज में जागरूकता और एकता बनाए रखने पर जोर दिया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों द्वारा पहलगाम आतंकी हमले पर आधारित एक भावनात्मक नाटक प्रस्तुत किया गया, जिसने उपस्थित लोगों को गहराई से प्रभावित किया। नाटक के माध्यम से आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता और शांति का संदेश दिया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने सम्मेलन को और भी प्रभावशाली बना दिया।
वेद वन पार्क के अलावा सेक्टर-121, सेक्टर-40, सेक्टर-117 से 120, सेक्टर-77 सहित शहर के विभिन्न इलाकों में भी हिंदू सम्मेलन आयोजित किए गए। सभी स्थानों पर बड़ी संख्या में लोगों की सहभागिता देखने को मिली। आयोजकों के अनुसार इन सम्मेलनों का उद्देश्य समाज में सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक समरसता और राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करना था।
सम्मेलन के सफल आयोजन के साथ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष को जनभागीदारी के माध्यम से स्मरणीय बनाने का प्रयास किया गया। आयोजकों ने कहा कि आने वाले समय में भी इसी तरह के सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे।
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