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Rafale Deal India 2026: सेना की ताकत में बड़ा इजाफा तय, नए राफेल, पी-8आई समुद्री टोही विमान समेत 3.60 लाख करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी

Rafale Deal India 2026: सेना की ताकत में बड़ा इजाफा तय, नए राफेल, पी-8आई समुद्री टोही विमान समेत 3.60 लाख करोड़ के रक्षा सौदों को मंजूरी

नई दिल्ली, 12 फरवरी। देश की सैन्य क्षमता को नई मजबूती देने के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) ने लगभग 3.60 लाख करोड़ रुपये के पूंजीगत रक्षा खरीद प्रस्तावों को स्वीकृति (Acceptance of Necessity—AoN) प्रदान की है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में हुई इस अहम बैठक में थलसेना, नौसेना और वायुसेना की परिचालन क्षमता बढ़ाने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को हरी झंडी दी गई। इन फैसलों से न केवल सेना की मारक क्षमता में इजाफा होगा, बल्कि आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी गति मिलेगी।

बैठक में भारतीय वायुसेना के लिए मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (एमआरएफए) के तहत नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई। सूत्रों के अनुसार, इन विमानों का बड़ा हिस्सा भारत में निर्मित किया जाएगा, जिससे स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और देश में तकनीकी विशेषज्ञता का विस्तार होगा। राफेल विमानों के शामिल होने से वायुसेना की वायु श्रेष्ठता, सटीक हमला क्षमता और लंबी दूरी की स्ट्राइक पावर में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

इसके अलावा वायुसेना के लिए आधुनिक कॉम्बैट मिसाइलों की खरीद को भी स्वीकृति मिली है। ये मिसाइलें लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने में सक्षम होंगी, जिससे भविष्य के युद्ध परिदृश्यों में भारत की सामरिक बढ़त और मजबूत होगी। साथ ही एयर-शिप आधारित हाई एल्टीट्यूड प्स्यूडो सैटेलाइट (AS-HAPS) प्रणाली को भी मंजूरी दी गई है। यह प्रणाली उच्च ऊंचाई पर लंबे समय तक तैनात रहकर निगरानी, खुफिया जानकारी संग्रह और संचार सहायता प्रदान करेगी, जिससे सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक समय की जानकारी मिल सकेगी।

भारतीय थलसेना के लिए एंटी-टैंक माइन ‘विभव’ की खरीद को हरी झंडी दी गई है। यह माइन दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों को निष्क्रिय करने में सक्षम होगी। इसके साथ ही टी-72 टैंक, बीएमपी-II इंफैंट्री कॉम्बैट व्हीकल और आर्मर्ड रिकवरी व्हीकल्स के ओवरहॉल को भी स्वीकृति मिली है। इस निर्णय से मौजूदा सैन्य उपकरणों की सेवा आयु बढ़ेगी और उनकी परिचालन क्षमता बेहतर होगी।

नौसेना को भी इस पैकेज में महत्वपूर्ण मजबूती मिलने जा रही है। 4 मेगावाट मरीन गैस टरबाइन आधारित पावर जनरेटर की खरीद को मंजूरी दी गई है, जो युद्धपोतों की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायक होंगे। साथ ही पी-8आई समुद्री टोही विमान की खरीद को भी स्वीकृति दी गई है। ये विमान हिंद महासागर क्षेत्र में निगरानी, पनडुब्बी रोधी अभियान और समुद्री सुरक्षा के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। इनके शामिल होने से समुद्री सीमाओं की निगरानी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और मजबूत होगी।

भारतीय तटरक्षक बल के डॉर्नियर विमानों के लिए अत्याधुनिक इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल/इन्फ्रारेड (EO/IR) सिस्टम की खरीद को भी मंजूरी दी गई है। इससे समुद्री निगरानी, खोज एवं बचाव अभियान और तटीय सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी बढ़त मिलेगी।

विशेषज्ञों का मानना है कि 3.60 लाख करोड़ रुपये के इन रक्षा अधिग्रहण प्रस्तावों से तीनों सेनाओं की संयुक्त युद्ध क्षमता में बड़ा सुधार होगा। साथ ही ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल के तहत घरेलू रक्षा उद्योग, एमएसएमई और आपूर्ति श्रृंखला को भी बड़ा प्रोत्साहन मिलेगा। यह फैसला भारत की सामरिक तैयारियों को नई ऊंचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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