दिल्ली

Panch Kalyanak Mahotsav: जियो और जीने दो का संदेश देता पंच कल्याणक महोत्सव, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता हुए शामिल

Panch Kalyanak Mahotsav: जियो और जीने दो का संदेश देता पंच कल्याणक महोत्सव, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता हुए शामिल

रिपोर्ट: रवि डालमिया

दिल्ली के निर्माण विहार क्षेत्र में जैन समाज द्वारा आयोजित पंच कल्याणक महोत्सव भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक ऊर्जा के अद्भुत संगम के रूप में सामने आया। यह भव्य धार्मिक आयोजन जैन समाज के महान संत गुप्ती सागर जी महाराज गुरुदेव के पावन सान्निध्य में संपन्न हुआ, जिसमें जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव जी के पंचम जन्म कल्याणक उत्सव को विधि-विधान और आस्था के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत कर आयोजन की गरिमा को और बढ़ाया।

अपने संबोधन में विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने जैन समाज के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि जैन समाज का मूल दर्शन सत्य, अहिंसा और शांति पर आधारित है। उन्होंने कहा कि “जियो और जीने दो” का सिद्धांत आज के समय में केवल एक धार्मिक विचार नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए मार्गदर्शक विचारधारा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब समाज में करुणा, संयम और सहअस्तित्व की भावना मजबूत होती है, तभी स्थायी शांति और विकास संभव हो पाता है।

विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि जैन समाज ने सदैव नैतिक मूल्यों और आत्मसंयम के जरिए समाज को सही दिशा दी है। उन्होंने यह भी साझा किया कि गुरुदेव गुप्ती सागर जी महाराज का आशीर्वाद उन्हें निरंतर प्राप्त होता रहा है, जिसे वे अपना सौभाग्य मानते हैं। उन्होंने आयोजन समिति को इस भव्य और अनुशासित कार्यक्रम के लिए बधाई देते हुए कहा कि ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन समाज में सकारात्मक सोच, आपसी भाईचारे और नैतिक मूल्यों को मजबूत करते हैं।

पंच कल्याणक महोत्सव के दौरान निर्माण विहार का संपूर्ण वातावरण आध्यात्मिक रंग में रंगा हुआ नजर आया। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्र में भक्तों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। साधु-संतों, समाज के गणमान्य लोगों और श्रद्धालुओं की सहभागिता ने आयोजन को भव्य स्वरूप प्रदान किया। महोत्सव का प्रमुख आकर्षण पंडुक वन स्थित पंडुक शिला का 1008 कलशों से किया गया भव्य अभिषेक रहा। मंत्रोच्चारण, शंखनाद और जयकारों के बीच हुए इस अभिषेक ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।

आयोजन समिति के सदस्यों ने बताया कि पंच कल्याणक महोत्सव का उद्देश्य जैन धर्म के मूल सिद्धांतों—अहिंसा, सत्य, करुणा, आत्मशुद्धि और त्याग—का प्रचार-प्रसार करना है। यह महोत्सव न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि जैन समाज की सांस्कृतिक विरासत, एकता और अनुशासन को भी दर्शाता है।

श्रद्धालुओं का कहना है कि ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी परंपराओं और मूल्यों से जोड़ने का कार्य करते हैं। पंच कल्याणक महोत्सव ने यह संदेश दिया कि धार्मिक आस्था के साथ-साथ सामाजिक जिम्मेदारी और मानवीय मूल्यों को अपनाना ही सच्ची साधना है।

ममूटी ने कहा कि उन्हें ‘मेगास्टार’ की उपाधि पसंद नहीं है, उन्हें लगता है कि उनके जाने के बाद लोग उन्हें याद नहीं रखेंगे

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