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Noida Digital Arrest Scam: 20 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर बुजुर्ग कारोबारी से 1.29 करोड़ की ठगी

Noida Digital Arrest Scam: 20 दिन तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ कर बुजुर्ग कारोबारी से 1.29 करोड़ की ठगी

Noida के ग्रेटर नोएडा इलाके में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का डर दिखाकर एक बुजुर्ग कारोबारी से 20 दिनों तक मानसिक दबाव बनाते हुए 1 करोड़ 29 लाख रुपये से अधिक की ठगी कर ली। पीड़ित ने मामले की शिकायत दर्ज कराई है, जिसके बाद पुलिस जांच में जुट गई है।

जानकारी के अनुसार Surajpur निवासी 72 वर्षीय दिलीप कुमार दास को 6 फरवरी को एक कॉल आई, जिसमें कॉलर ने खुद को सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताया। उसने दावा किया कि उनके नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों में हो रहा है और मामला गंभीर जांच के दायरे में है।

इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए एक नकली कोर्ट रूम जैसा माहौल दिखाया, जहां एक व्यक्ति जज और दूसरा पुलिस अधिकारी के रूप में मौजूद था। इस सेटअप के जरिए पीड़ित को विश्वास दिलाया गया कि यदि उन्होंने सहयोग नहीं किया तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

ठगों ने पीड़ित पर लगातार दबाव बनाते हुए उन्हें घर से बाहर न निकलने और फोन कॉल लगातार चालू रखने के लिए कहा, जिससे वह पूरी तरह उनके नियंत्रण में रहे। इसके बाद बैंक खातों की जांच के नाम पर उनसे अलग-अलग खातों में पैसे ट्रांसफर करवाए गए, यह कहकर कि जांच पूरी होने के बाद पूरी रकम वापस कर दी जाएगी।

डर और भ्रम में आकर पीड़ित ने कई किश्तों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी। 13 फरवरी को करीब 51.95 लाख रुपये, 19 फरवरी को 48.95 लाख रुपये, 21 फरवरी को 10.95 लाख रुपये, 25 फरवरी को 17.20 लाख रुपये और 26 फरवरी को 56,962 रुपये ट्रांसफर किए गए। इस तरह कुल 1.29 करोड़ रुपये से अधिक की रकम ठगों के खातों में चली गई।

इतना ही नहीं, ठगों ने बाद में Supreme Court of India और Mumbai Police के नाम से फर्जी लेटर भेजकर पीड़ित को भरोसा दिलाया कि उन्हें ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ मिल गया है और जल्द ही पैसे वापस कर दिए जाएंगे।

काफी समय बीतने के बाद भी जब पैसे वापस नहीं मिले, तब पीड़ित को ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने 12 मार्च को ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। फिलहाल सेक्टर-36 स्थित साइबर क्राइम थाने की पुलिस मामले की जांच कर रही है और संबंधित बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि साइबर अपराधी किस तरह तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं।

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